उज्जैन। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील का असर बुधवार को स्थानीय अधिकारियों के निरीक्षण में देखने को मिला। संभागायुक्त, कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त, यूडीए के सीईओ सहित विभिन्न विभाग के अधिकारी अपनी-अपनी कारों में अलग-अलग सवार होने के बजाय एक ही बस में सवार होकर शिप्रा नदी के तट का निरीक्षण करने पहुंचे। अधिकारियों का यह कदम न केवल ईंधन बचाने का संदेश था, बल्कि टीम वर्क की एक बड़ी मिसाल भी बना।
🚶♂️ 9 किमी की पैदल यात्रा: कच्चे रास्तों और झाड़ियों के बीच पहुंचे अधिकारी
एक निश्चित जगह पहुंचकर अधिकारियों ने अपनी विलासिता को त्याग कर आगे की 9 किमी लंबी यात्रा पैदल तय की। इस पैदल निरीक्षण की शुरुआत गऊघाट से की गई। कच्चे रास्तों, झाड़ियों और निर्माणाधीन क्षेत्रों के बीच से गुजरते हुए पूरी टीम त्रिवेणी क्षेत्र तक पहुंची और वहां निर्माणाधीन घाट का बारीकी से मुआयना किया। धूप और कठिन रास्तों के बावजूद अधिकारियों ने जमीनी हकीकत जानने के लिए यह सफर जारी रखा।
📐 घाटों का कायाकल्प: 140 स्थानों पर सड़क बनाने के लिए मार्किंग पूरी
निरीक्षण के दौरान बताया गया कि पिछले पांच दिनों में अधिकारियों ने कुल 29 किमी लंबे निर्माणाधीन घाटों का जायजा लिया है। इस व्यापक सर्वे का मुख्य उद्देश्य श्रद्धालुओं के लिए घाट तक पहुंच को आसान बनाना है। इसके लिए पूरी टीम ने मिलकर 140 ऐसे स्थानों को चिह्नित किया है जहाँ नई सड़कों का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है। इससे आने वाले समय में शिप्रा तट पर आने वाले श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिलेगी।
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