भोपाल। राजधानी के बावड़िया कलां क्षेत्र में सरकारी नाले को दबाकर किए गए अवैध निर्माणों पर अब राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने कड़ा रुख अपनाया है। एनजीटी ने स्पष्ट कर दिया है कि नाले के प्राकृतिक स्वरूप से कोई समझौता नहीं होगा। कोर्ट ने कलेक्टर को सख्त निर्देश दिए हैं कि क्षेत्र के सभी अतिक्रमण चिह्नित कर तीन माह के भीतर हटाए जाएं।
📏 6 मीटर का नाला सिमटकर हुआ आधा: तहसीलदार की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
तहसीलदार की सीमांकन रिपोर्ट ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। जिस नाले की चौड़ाई राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार छह मीटर होनी चाहिए थी, वह रसूखदारों के अवैध निर्माण के कारण घटकर मात्र दो से चार मीटर रह गई है। सरकारी जमीन पर किए गए इस कब्जे के कारण जल निकासी पूरी तरह बाधित हो रही है।
⚠️ बाढ़ का खतरा: एनजीटी ने दी 2016 जैसी भीषण तबाही की चेतावनी
एनजीटी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए चेतावनी दी है कि यदि ये निर्माण समय रहते नहीं हटे, तो शहर को 2016 जैसी भीषण बाढ़ का सामना करना पड़ सकता है। नाले का संकुचित होना भविष्य में बड़े जलभराव और जान-माल के नुकसान का कारण बन सकता है। प्रशासन ने अब कोर्ट के आदेश के बाद अतिक्रमणकारियों की सूची तैयार करना शुरू कर दिया है।
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