बेंगलुरु: भारत की प्रतिष्ठित अंतरिक्ष एजेंसी इसरो (ISRO) इस वक्त वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों के बड़े पैमाने पर संस्थान छोड़ने यानी ‘ब्रेन ड्रेन’ के गंभीर संकट से जूझ रही है। सूत्रों के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों के भीतर इसरो के करीब 100 से 120 वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। चिंताजनक बात यह है कि इनमें से कई वैज्ञानिक देश के सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट ‘गगनयान’ (Gaganyaan) और ‘चंद्रयान’ (Chandrayaan) जैसे बड़े मिशनों की रीढ़ माने जाते थे।
गगनयान और चंद्रयान मिशन से जुड़े कई बड़े चेहरों ने छोड़ा साथ
इसरो में वर्तमान में कुल मिलाकर लगभग 14,600 कर्मचारी काम करते हैं। आंतरिक सूत्रों के अनुसार, इस्तीफे की सबसे बड़ी लहर इसरो के दो बड़े सेंटर्स में देखी गई है। बेंगलुरु स्थित केंद्र से सबसे अधिक झटका लगा है, जहां अकेले करीब 80 वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मचारियों ने एक साथ संस्थान को अलविदा कह दिया। वहीं, तिरुवनंतपुरम स्थित रणनीतिक केंद्र (VSSC) से भी करीब 20 वरिष्ठ वैज्ञानिकों के इस्तीफे सामने आए हैं। इन इस्तीफों में जूनियर स्टाफ नहीं, बल्कि इसरो की सबसे गोपनीय परियोजनाओं को लीड करने वाले बड़े चेहरे शामिल हैं। LVM-3 रॉकेट कार्यक्रम के प्रोजेक्ट डायरेक्टर विक्टर जोसेफ, ‘स्पेडेक्स’ (SPADEX) मिशन के प्रोजेक्ट डायरेक्टर और चंद्रयान-3 मिशन के प्रोजेक्ट मैनेजर आदित्य रावपल्ली जैसे बड़े दिग्गजों ने भी इसरो से नाता तोड़ लिया है।
इस्तीफों की लहर रोकने के लिए सरकार ने लागू किए सख्त नियम
वैज्ञानिकों के इस तरह अचानक संस्थान छोड़ने से केंद्र सरकार और अंतरिक्ष विभाग में खलबली मच गई है। स्थिति को संभालने के लिए सरकार ने 14 जुलाई 2026 को एक बेहद सख्त आधिकारिक आदेश जारी किया है, जिसके तहत स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) और इस्तीफे के नियमों को कड़ा कर दिया गया है। अंतरिक्ष विभाग ने 2020 के पुराने सर्विस नियमों को तुरंत प्रभाव से बदल दिया है। अब किसी भी सेंटर के ‘सेंटर डायरेक्टर’ किसी भी वैज्ञानिक का इस्तीफा सीधे स्वीकार नहीं कर पाएंगे। विशेष रूप से गगनयान या किसी अन्य बड़े मिशन से जुड़े वैज्ञानिकों के मामलों को पूरी सिफारिश और वजहों के साथ अंतिम फैसले के लिए नई दिल्ली स्थित अंतरिक्ष विभाग (DoS) के पास भेजना अनिवार्य कर दिया गया है।
प्राइवेट स्पेस सेक्टर में मिल रहे बेहतर अवसर हो सकते हैं वजह
इसरो के शीर्ष नेतृत्व ने इस पूरे घटनाक्रम को स्वीकार किया है। उन्होंने इन इस्तीफों की आधिकारिक पुष्टि करते हुए कहा कि संगठन किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है और मिशन के काम प्रभावित नहीं होंगे। दूसरी ओर, अंतरिक्ष क्षेत्र के कुछ पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञों का मानना है कि केवल प्रशासनिक आदेश जारी करके इस्तीफों को रोकना सही समाधान नहीं है। भारत में अब प्राइवेट स्पेस सेक्टर (Private Space Sector) बहुत तेजी से बढ़ रहा है, जहां इन अनुभवी वैज्ञानिकों को बेहतर सैलरी पैकेज, सुविधाएं और नए अवसर मिल रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को प्रशासनिक सख्ती के बजाय वैज्ञानिकों की इन जमीनी समस्याओं और असंतोष की असली वजहों को दूर करने पर ध्यान देना चाहिए।
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