सीधी। मध्य प्रदेश के सीधी जिले में वन विभाग की टीम ने दो अलग-अलग जगहों पर दुर्लभ प्रजाति के सैंड बोआ सांप को रेस्क्यू किया है। पहला सांप रामगढ़ गांव में मिला, जबकि दूसरा जोरौधा बायपास के पास मिला। वनपाल पंकज मिश्रा के नेतृत्व में वन विभाग की टीम ने दोनों सांपों को सुरक्षित रूप से पकड़कर प्रकृति के गोद में छोड़ दिया है।
सूत्रों के अनुसार इसकी दुर्लभता के कारण यह मंहगा है। अंतरराष्ट्रीय बजार में रेड सैंड बोआ सांप की कीमत 1 करोड़ से लेकर 25 करोड़ तक है। इस सांप का उपयोग आमतौर पर तांत्रिक विभिन्न उद्देश्यों के लिए करते हैं। कई लोगों का मानना है कि इस सांप का इस्तेमाल यौन शक्ति बढ़ाने वाली दवा बनाने के लिए किया जा सकता है। इसलिए इसे ऊंचे दामों पर बेचा जाता है। इसके साथ ही कई दवाओं में भी इसका इस्तेमाल होता है। यह सांप 1972 में भारत सरकार ने इस सांप को ‘संरक्षित पशु’ घोषित किया।
– सैंड बोआ सांप एक दुर्लभ प्रजाति का सांप है, जो अपनी विशिष्ट पूंछ के कारण प्रसिद्ध है।
– विदेशों में इस सांप की कीमत 1 करोड़ से 25 करोड़ रुपये तक हो सकती है, जो इसकी दुर्लभता और मांग पर निर्भर करती है।
वनपाल पंकज मिश्रा ने बताया कि दोनों सांपों को सुरक्षित रूप से पकड़कर प्रकृति के गोद में छोड़ दिया गया है। वन विभाग की टीम ने दोनों सांपों को रेस्क्यू करने के लिए विशेष सावधानी बरती, ताकि उन्हें कोई नुकसान न पहुंचे।
सैंड बोआ सांप जैसे दुर्लभ प्रजातियों के संरक्षण के लिए वन विभाग और स्थानीय लोगों का सहयोग बहुत जरूरी है। वन विभाग की टीम लगातार ऐसे सांपों को रेस्क्यू करने और उन्हें सुरक्षित स्थान पर छोड़ने के लिए काम कर रही है।
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