रामगढ़: रजरप्पा मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के साथ कथित मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद रामगढ़ पुलिस प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है. वायरल वीडियो में श्रद्धालुओं के साथ जिस तरह पुलिसकर्मियों द्वारा लाठी-डंडों से मारपीट की जा रही थी. उसकी गंभीरता को देखते हुए रामगढ़ पुलिस अधीक्षक खुद रजरप्पा मंदिर पहुंचे और पूरे मामले की जांच की.
रामगढ़ एसपी अजय कुमार ने मौके पर स्थिति की जानकारी लेने के बाद तत्काल कार्रवाई की है. उन्होंने ड्यूटी पर तैनात चार जैप (झारखंड सशस्त्र पुलिस) जवानों और एक होमगार्ड जवान को निलंबित कर दिया है. इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में भी हड़कप देखी जा रही है.
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि वायरल वीडियो की जांच के बाद प्रथम दृष्टया मामला गंभीर पाया गया, जिसके बाद संबंधित कर्मियों पर तत्काल विभागीय कार्रवाई की गई है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि रजरप्पा मंदिर जैसे आस्था के केंद्र में आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता है. किसी भी हाल में श्रद्धालुओं को अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए और पुलिसकर्मियों को भी अपनी जिम्मेदारियों का पालन संयम और अनुशासन के साथ करना होगा.
जिन पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की गई है उनमें आरक्षी श्याम लाल महतो, आरक्षी राधेश्याम कुजूर, आरक्षी बहादुर उरांव और आरक्षी जॉनसन सुरीन शामिल हैं. ये सभी आरक्षी सैट-112 कैम्प रजरप्पा, झारखंड सशस्त्र पुलिस-04 बोकारो में तैनात थे. इन सभी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. निलंबन अवधि के दौरान इनका मुख्यालय झारखंड सशस्त्र पुलिस-04, बोकारो निर्धारित किया गया है.
इसके साथ ही संबंधित रक्षित पदाधिकारी को निर्देश दिया गया है कि पूरे मामले में आरोप-प्रारूप तैयार कर समादेष्टा झारखंड सशस्त्र पुलिस-04, बोकारो के समक्ष प्रस्तुत किया जाए. जिससे आगे की विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया पूरी की जा सके.
पुलिस अधीक्षक ने यह भी कहा कि रजरप्पा मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. ऐसे में पुलिस की जिम्मेदारी है कि भीड़ प्रबंधन के साथ-साथ श्रद्धालुओं के साथ शालीन और संयमित व्यवहार किया जाए. उन्होंने कहा कि अगर जांच में किसी अन्य कर्मी की भूमिका भी सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी.
इस घटना के बाद प्रशासन ने मंदिर परिसर में ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को भी निर्देश दिया है कि वे श्रद्धालुओं के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करें. जिससे मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा या परेशानी का सामना न करना पड़े.
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