रांची यूनिवर्सिटी के छात्रों का भविष्य दांव पर! UG रिजल्ट अटका तो PG में कैसे होगा दाखिला? पटरी से उतरा उच्च शिक्षा का सत्र; देखें लेटेस्ट अपडेट

झारखण्ड

रांचीः झारखंड में उच्च शिक्षा का शैक्षणिक सत्र लगातार बिगड़ता जा रहा है. सबसे ज्यादा असर रांची यूनिवर्सिटी (आरयू) में दिख रहा है, जहां स्नातक सत्र 2022–25 का परिणाम अब तक जारी नहीं हो पाया है. नतीजा यह है कि स्नातकोत्तर सत्र 2025–27 में नामांकन की प्रक्रिया भी अटक गई है और हजारों छात्र अपने भविष्य को लेकर असमंजस में हैं.

इस बीच ईटीवी भारत की टीम ने रांची विश्वविद्यालय कैंपस का जायजा लिया, जहां स्थिति चिंताजनक दिखी. कई विभागों और कक्षाओं में ताले लटके नजर आए और परिसर में छात्र लगभग नदारद दिखे. नामांकन प्रक्रिया ठप होने और कक्षाएं नियमित नहीं चलने की वजह से विश्वविद्यालय परिसर में सन्नाटा पसरा हुआ है.

अगर शैक्षणिक और परीक्षा कैलेंडर नियमित रहता तो स्नातक फाइनल वर्ष का परिणाम जून 2025 तक घोषित हो जाना चाहिए था. इसके बाद जुलाई-अगस्त में पीजी में नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो जाती. विश्वविद्यालय प्रशासन ने जनवरी 2026 से स्नातकोत्तर सत्र शुरू करने की घोषणा भी की थी, लेकिन यूजी रिजल्ट लंबित रहने के कारण यह योजना लागू नहीं हो सकी.

स्नातक फाइनल का परिणाम जारी नहीं होने से करीब 30 हजार छात्र उच्च शिक्षा के अगले चरण में प्रवेश का इंतजार कर रहे हैं. छात्र लगातार रिजल्ट जारी करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन मूल्यांकन और परिणाम प्रकाशन की धीमी प्रक्रिया के कारण पूरा शैक्षणिक ढांचा प्रभावित हो रहा है.

मिड सेमेस्टर परीक्षा भी नहीं हो सकी

पीजी विभागों और संबद्ध कॉलेजों में अब तक मिड सेमेस्टर परीक्षा आयोजित हो जानी चाहिए थी, लेकिन नामांकन ही नहीं हो पाने के कारण शैक्षणिक गतिविधियां आगे नहीं बढ़ पा रही हैं. कई विभागों में कक्षाएं नियमित रूप से शुरू नहीं हो सकी हैं, जिससे पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हो रही है.

सत्र लेट होने के प्रमुख कारण

विशेषज्ञों के अनुसार शैक्षणिक सत्र के लगातार पीछे जाने के पीछे कई कारण हैं जैसे-

समय पर परीक्षा आयोजित नहीं होना

निर्धारित शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार परीक्षाएं आयोजित नहीं हो सकीं. परीक्षा में देरी होने से परिणाम भी लगातार पीछे खिसकते गए. जबकि राज्य सरकार की ओर से निर्देश है कि परीक्षा समाप्त होने के एक महीने के भीतर परिणाम घोषित कर दिया जाए.

उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में देरी

परीक्षा के बाद कॉपियों की जांच समय पर पूरी नहीं हो पाती. उदाहरण के तौर पर 28 जनवरी को स्नातक सिक्स सेमेस्टर की परीक्षा समाप्त हुई, लेकिन अब तक कई विषयों की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन प्रारंभिक चरण में ही है.

शैक्षणिक कैलेंडर का पालन नहीं

परीक्षा, मूल्यांकन और परिणाम जारी करने की तय समय-सीमा का सख्ती से पालन नहीं होने से पूरा शैक्षणिक ढांचा प्रभावित हो रहा है और सत्र लगातार पीछे खिसक रहा है.

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