खजुराहो के मतंगेश्वर महादेव: हर साल बढ़ता है रहस्यमयी जीवित शिवलिंग, सावन के अंतिम सोमवार उमड़ा जनसैलाब

मध्य प्रदेश

छतरपुर (मध्य प्रदेश): यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल खजुराहो स्थित ऐतिहासिक एवं पौराणिक मतंगेश्वर महादेव मंदिर में सावन मास के अंतिम सोमवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।

सुबह के समय से ही मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र “हर-हर महादेव” तथा “बम-बम भोले” के गगनभेदी जयकारों से गुंजायमान हो उठा। दूर-दराज और आसपास के जिलों से पहुंचे हजारों भक्तों ने कतारबद्ध होकर भगवान शिव का गंगाजल, दूध, बेलपत्र और धतूरे से अभिषेक किया तथा सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य व खुशहाली की कामना की।

🔱 हर साल बढ़ता है चमत्कारी शिवलिंग, जमीन के 9 फीट ऊपर और 9 फीट नीचे है स्थित

मंदिर की अनूठी बनावट और जीवित शिवलिंग की मान्यता:

  • जीवित शिवलिंग की ख्याति: मंदिर के पुजारियों के अनुसार, लगभग 1000 वर्ष पुराने इस चंदेलकालीन मंदिर का शिवलिंग ‘जीवित शिवलिंग’ माना जाता है।

  • विशाल संरचना: इस दिव्य शिवलिंग की ऊंचाई लगभग 2.5 मीटर (करीब 9 फीट बाहर) और जमीन के नीचे गहराई भी लगभग 9 फीट है, जबकि इसका व्यास 1.1 मीटर है।

  • आकार में वृद्धि: जनमान्यता है कि यह शिवलिंग प्रतिवर्ष तिल के समान आकार में बढ़ता है; पौराणिक मत है कि यह ऊपर स्वर्गलोक और नीचे पाताल लोक की ओर अग्रसर है।

💎 भगवान शिव की मरकत मणि और कार्तिकेय जी को प्रथम भोग की विशेष परंपरा

पौराणिक कथाएं और मंदिर की परंपराएं:

  • मरकत मणि का रहस्य: धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, भगवान शिव द्वारा धर्मराज युधिष्ठिर को दी गई चमत्कारी ‘मरकत मणि’ कालांतर में मतंग ऋषि को प्राप्त हुई थी, जिसे इस पावन शिवलिंग के ठीक नीचे स्थापित किया गया है।

  • प्रथम भोग विधान: मंदिर में सर्वप्रथम भगवान कार्तिकेय को भोग लगाने की विशेष परंपरा है। इसके साथ ही माता पार्वती के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त करने की भी प्राचीन रीति निभाई जाती है।

  • मनोकामना पूर्ति: मान्यता है कि सावन माह में बाबा मतंगेश्वर के दर्शन और जलाभिषेक से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

🛡️ शिवसागर तालाब के घाटों की सफाई और सुरक्षा के कड़े प्रशासनिक इंतजाम

प्रशासनिक व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधा:

  • घाटों की स्वच्छता: श्रद्धालुओं की भारी आमद को देखते हुए खजुराहो नगर परिषद के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) बसंत चतुर्वेदी के निर्देशन में शिवसागर तालाब के घाटों की सघन सफाई कराई गई ताकि स्नान में कोई असुविधा न हो।

  • सुरक्षा एवं यातायात प्रबंधन: मंदिर परिसर, प्रवेश द्वारों और संवेदनशील मार्गों पर पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा के चाक-चौबंद प्रबंध किए गए, जिससे दर्शनार्थियों को सुगम दर्शन प्राप्त हो सके।

What do you feel about this post?

0%
like

Like

0%
love

Love

0%
happy

Happy

0%
haha

Haha

0%
sad

Sad

0%
angry

Angry