मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के लिए कानूनी मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। ग्वालियर की विशेष MP-MLA कोर्ट ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है। अदालत ने भिंड के पुलिस अधीक्षक (SP) को सख्त निर्देश दिए हैं कि आगामी 27 जुलाई को होने वाली सुनवाई में पटवारी की उपस्थिति हर हाल में सुनिश्चित की जाए। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी कड़ी नाराजगी जाहिर की।
🔍 क्या है भिंड FIR का पूरा मामला?
यह विवाद 2024 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान का है। आरोप है कि जीतू पटवारी ने बसपा के तत्कालीन उम्मीदवार देवाशीष जरारिया पर भाजपा के साथ सांठगांठ करने का सार्वजनिक आरोप लगाया था। इस बयान के बाद 4 मई 2024 को भिंड के उमरी थाने में आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन और अन्य धाराओं के तहत उनके खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की गई थी।
🏛️ अदालती समन और अनुपस्थिति
इस मामले में कोर्ट ने 16 जनवरी 2026 को जीतू पटवारी को अदालत में पेश होने के लिए समन जारी किया था। हालांकि, तय तारीख पर उनकी अनुपस्थिति और लगातार अदालती कार्रवाई से दूरी बनाए रखने के कारण कोर्ट को यह कड़ा रुख अपनाना पड़ा। कोर्ट ने पुलिस से सवाल किया कि जब पटवारी की राजनीतिक गतिविधियां हर जगह सक्रिय दिख रही हैं, तो पुलिस उन्हें ढूंढ क्यों नहीं पा रही है?
⏳ अब भिंड पुलिस की भूमिका पर टिकी निगाहें
कोर्ट के इस आदेश के बाद अब भिंड पुलिस प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या आगामी 27 जुलाई को भिंड पुलिस अदालत के आदेशों का पालन करा पाती है या नहीं।
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