जबलपुर के बहुचर्चित बरगी बांध क्रूज हादसे की न्यायिक जांच अब एक नए और महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गई है। हादसे के दौरान मौके पर मौजूद रहे और बचाव कार्य में सक्रिय भूमिका निभाने वाले बरगी निवासी नीरज मिश्रा ने जांच आयोग के समक्ष कई गंभीर खुलासे किए हैं। उन्होंने प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करते हुए साक्ष्य के तौर पर वीडियो और पेन ड्राइव आयोग को सौंपी है।
🚑 ‘108 एम्बुलेंस में नहीं था कोई मेडिकल स्टाफ’
नीरज मिश्रा ने अपने दावों में बताया कि दुर्घटना के तुरंत बाद जब 108 एम्बुलेंस मौके पर पहुंची, तो उसमें चालक के अलावा कोई भी प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ मौजूद नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि स्टाफ की अनुपस्थिति के कारण घायलों को मौके पर प्राथमिक उपचार (First Aid) नहीं मिल सका, जो उनकी जान बचाने के लिए बेहद जरूरी था। इस संबंध में उन्होंने 14 बिंदुओं पर आधारित एक विस्तृत शिकायत न्यायिक जांच आयोग को दी है।
📂 जांच आयोग के पास पहुंचे पुख्ता साक्ष्य
नीरज मिश्रा द्वारा सौंपी गई शिकायत में हादसे के बाद की स्थितियों का विस्तार से विवरण है। आयोग अब इन साक्ष्यों का परीक्षण करेगा ताकि यह पता लगाया जा सके कि बचाव कार्यों के दौरान प्रोटोकॉल का पालन क्यों नहीं हुआ और इसके लिए जिम्मेदार कौन है। प्रत्यक्षदर्शी के इस बयान ने अब स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है।
संपादकीय टिप्पणी: बचाव कार्यों में बुनियादी मेडिकल सुविधाओं का अभाव किसी भी बड़े हादसे में मौतों का आंकड़ा बढ़ा सकता है। क्या प्रशासन को ऐसी आपदाओं के लिए विशेष ‘डिजास्टर रिस्पांस प्रोटोकॉल’ को और अधिक सख्त नहीं करना चाहिए? अपने विचार नीचे साझा करें।
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