मध्य प्रदेश की राजनीति में इंदौर की उपेक्षा के बाद अब जबलपुर (महाकौशल) के विकास का मुद्दा छाया हुआ है। राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने कैलाश विजयवर्गीय के बयान का हवाला देते हुए राज्य सरकार पर जबलपुर की उपेक्षा का आरोप लगाया है। तन्खा का कहना है कि यदि इंदौर के लिए सवाल उठाए जा सकते हैं, तो जबलपुर में तो बगावत होनी चाहिए।
📝 विवेक तन्खा ने उठाए ये गंभीर सवाल
सांसद विवेक तन्खा ने अपने ट्वीट में जबलपुर की बदहाल स्थिति पर सरकार को घेरा है। उन्होंने कई प्रमुख मुद्दे सामने रखे हैं:
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उद्योगों का अभाव: पिछले 30-40 सालों में जबलपुर में कोई नया बड़ा उद्योग नहीं आया है।
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संस्थानों का बंटवारा: मेडिकल यूनिवर्सिटी का विभाजन और मनेरी औद्योगिक क्षेत्र की दुर्दशा।
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रोजगार की कमी: वस्त्र उद्योग से जुड़ी 3 लाख महिलाओं के भविष्य पर कोई नीति नहीं।
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इंफ्रास्ट्रक्चर: डिफेंस फैक्ट्रियों की बदहाली, क्रिकेट स्टेडियम का न होना और डिफेंस क्लस्टर का ठंडे बस्ते में जाना।
🛡️ राकेश सिंह का बचाव: ‘भाजपा ने ही किया है विकास’
तन्खा के आरोपों पर पलटवार करते हुए प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि कांग्रेस को महाकौशल के विकास पर सवाल उठाने का कोई नैतिक हक नहीं है। सिंह के अनुसार, कांग्रेस के कार्यकाल में जबलपुर के लिए कुछ नहीं हुआ। उन्होंने दावा किया कि केवल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यकाल में लोक निर्माण विभाग के जरिए ही जबलपुर को 3,500 करोड़ रुपये की सौगातें मिली हैं। उन्होंने कांग्रेस को सलाह दी कि वे अपनी आंतरिक स्थिति देखें।
📊 मेट्रो और विकास में जबलपुर की अनदेखी?
सियासी गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि भोपाल और इंदौर को मेट्रोपॉलिटन सिटी बनाने की प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि जबलपुर को इससे दूर रखा गया है। मेट्रो प्रोजेक्ट हो या औद्योगिक विस्तार, महाकौशल की उपेक्षा के आरोप लगातार लग रहे हैं। हालांकि भाजपा सरकार इसे सिरे से खारिज कर रही है और विकास को अपनी प्राथमिकता बता रही है।
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