IIT-ISM के छात्रों का सिनेमाई धमाका! रिलीज हुई फिल्म ‘नुक्कड़ नाटक’; धनबाद के कलाकारों ने पर्दे पर उतारा सामाजिक सरोकार, जानें कैसी है फिल्म?

झारखण्ड

धनबादः आम तौर पर IIT-ISM में पढ़ने वाले छात्रों को लोग सिर्फ इंजीनियरिंग, लैब और किताबों तक सीमित समझते हैं. लेकिन यहां के छात्रों ने यह साबित कर दिया है कि उनकी प्रतिभा केवल तकनीक तक ही सीमित नहीं है. पढ़ाई के साथ-साथ रचनात्मकता और सामाजिक सरोकार को सामने लाते हुए छात्रों ने एक फिल्म बनाने में भी अहम भूमिका निभाई है. इसी कड़ी में सामाजिक मुद्दों पर आधारित फिल्म ‘नुक्कड़ नाटक’ अब धनबाद के सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है.

फिल्म में सामाजिक सोच की झलक

जमीनी कहानियों और लोगों की भागीदारी से बनी इस फिल्म का निर्देशन तन्मय शेखर ने किया है. उनका भी IIT-ISM से खास संबंध रहा है. वह संस्थान के पूर्व निदेशक प्रो. राजीव शेखर के बेटे हैं. उनकी मां एक शिक्षिका हैं और एक एनजीओ के माध्यम से गांवों और बस्तियों में शिक्षा के प्रति लोगों को जागरूक करने का काम करती रही हैं. इसी सामाजिक सोच की झलक फिल्म की कहानी में भी दिखाई देती है.

फिल्म की कहानी भी धनबाद की एक बस्ती से जुड़ी है. कहानी की शुरुआत आईआईटी-आईएसएम के कैंटीन स्टाफ द्वारा कुरकुरे चोरी की एक छोटी सी घटना से होती है. यह स्टाफ धनबाद की बगुला बस्ती धनबाद का रहने वाला होता है. उसकी दुखभरी कहानी सुनकर आईएसएम में पढ़ाई कर रहे दो छात्र-छात्राएं- मौलश्री और शिवांग उसकी मदद करने की जिम्मेदारी अपने ऊपर ले लेते हैं.

माता-पिता चाहते हैं कि बच्चे उनकी मदद करें

हालांकि इस मामले में दखल देने के कारण संस्थान का प्रबंधन उन्हें दंडित करता है और सजा के तौर पर शहर के बीचों-बीच स्थित बगुला बस्ती के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने की जिम्मेदारी दे देता है. यह काम दोनों छात्रों के लिए आसान नहीं होता, क्योंकि बस्ती के कई माता-पिता अपने बच्चों को स्कूल भेजने के बजाय घर चलाने में हाथ बंटाने के लिए काम पर लगाना चाहते हैं. दो वक्त की रोटी जुटाना ही उनके लिए बड़ी चुनौती होती है.

पढ़ाई का महत्व फैलाने का प्रयास

इन्ही कठिन परिस्थितियों के बीच दोनों छात्र, बच्चों को शिक्षा से जोड़ने की कोशिश करते हैं और धीरे-धीरे बस्ती के लोगों में पढ़ाई के महत्व को लेकर जागरूकता फैलाने का प्रयास करते हैं. फिल्म में मुख्य भूमिका आईआईटी-आईएसएम के छात्र मौलश्री और शिवांग ने निभाई है, जबकि बाल कलाकार के रूप में बगुला बस्ती की निर्मला हजारा नजर आती हैं. इसके अलावा धनबाद के बिपिन कुमार और काका जी भी फिल्म का हिस्सा हैं. अन्य कलाकारों में विनय कुमार और रांची की मोनिता सिन्हा शामिल हैं. इस फिल्म की शूटिंग 2023 में शुरू हुई थी.

IIT-ISM के कई छात्र फिल्म का हिस्सा

फिल्म के निर्माण में भी धनबाद के लोगों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. फिल्म के एसोसिएट डायरेक्टर अनिकेत मिश्रा धनबाद से हैं, जबकि प्रोड्यूसर राम प्रवेश कुमार ने स्थानीय स्तर पर निर्माण में अहम जिम्मेदारी निभाई. वहीं जूनियर आर्टिस्ट दीपक चौहान और IIT-ISM के कई छात्र भी फिल्म का हिस्सा रहे हैं.

फिल्म की शूटिंग धनबाद के कई वास्तविक स्थानों पर की गई है, जिनमें IIT-ISM, बिग बाजार रोड और बगुला बस्ती धनबाद प्रमुख हैं. इन स्थानों ने फिल्म की कहानी को वास्तविकता और स्थानीय रंग देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

स्थानीय कलाकारों तथा जमीनी कहानियों को समर्थन दें- टीम के सदस्य

रिलीज से पहले फिल्म की टीम ने IIT-ISM कैंपस में छात्रों के साथ संवाद भी किया था, जहां फिल्म निर्माण की प्रक्रिया और उसके सामाजिक सरोकारों पर चर्चा की गई. साथ ही बगुला बस्ती में स्थानीय लोगों को फिल्म दिखाकर उनसे प्रतिक्रिया भी ली गई. हालांकि धनबाद में फिल्म थोड़ी देर से रिलीज हुई, लेकिन देश के कई शहरों के सिनेमाघरों में यह पहले ही प्रदर्शित हो चुकी है. दर्शकों को यह फिल्म काफी पसंद आ रही है. फिल्म की टीम ने धनबाद की जनता से अपील की है कि वे सिनेमाघरों में जाकर इस फिल्म को देखें और स्थानीय कलाकारों तथा जमीनी कहानियों को अपना प्यार और समर्थन दें.

अगर युवा आगे आएं तो बदलाव संभव

फिल्म नुक्कड़ नाटक सिर्फ मनोरंजन भर नहीं है, बल्कि यह समाज को एक महत्वपूर्ण संदेश भी देती है. यह फिल्म बताती है कि शिक्षा किसी भी समाज को बदलने की सबसे बड़ी ताकत होती है. बगुला बस्ती जैसे इलाकों के बच्चों को पढ़ाई से जोड़ने की कहानी के माध्यम से फिल्म यह संदेश देती है कि अगर युवा आगे आएं और समाज की जिम्मेदारी समझें, तो बदलाव संभव है.

धनबाद के स्थानीय कलाकारों, लोकेशनों और IIT-ISM के छात्रों की भागीदारी से बनी यह फिल्म शहर की पहचान और जमीनी कहानियों को बड़े पर्दे पर लाने का भी प्रयास है. ऐसे में यह फिल्म न केवल दर्शकों का मनोरंजन करती है, बल्कि उन्हें सोचने पर भी मजबूर करती है कि समाज में शिक्षा और जागरूकता की कितनी अहम भूमिका है.

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