मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में किसानों की समस्याओं और जनहित के मुद्दों को लेकर राजनीतिक माहौल गर्माता जा रहा है। इसी कड़ी में भाजपा नेता एवं जिला पंचायत उपाध्यक्ष अमित सक्सेना ने मंगलवार को छिंदवाड़ा के मुख्य बस स्टैंड पर एक विशाल आमसभा का आयोजन कर अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन किया। भाजपा जिला अध्यक्ष की ओर से जारी नोटिस के बाद उनके तेवर बेहद आक्रामक नजर आए। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि वे पार्टी की किसी भी कार्रवाई से डरने वाले नहीं हैं और किसानों तथा आम जनता के हितों के लिए अपनी लड़ाई पूरी मजबूती से जारी रखेंगे। सभा के बाद उन्होंने कलेक्ट्रेट पहुंचकर राज्य शासन के नाम ज्ञापन भी सौंपा।
🚜 सूखे, मुआवजे और पानी के मुद्दे पर सरकार को घेरा: ‘मैं सर्कस का शेर नहीं, जनता के लिए लड़ूंगा’
आमसभा को संबोधित करते हुए अमित सक्सेना ने स्पष्ट कहा कि वे किसी के दबाव में काम करने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा, “मैं सर्कस का शेर नहीं हूं, मुझे जनता ने चुना है और मैं जनता की लड़ाई लड़ूंगा। अगर इसके एवज में मेरा निष्कासन भी होता है, तो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।” अपने ज्ञापन में उन्होंने छिंदवाड़ा जिले को तुरंत सूखाग्रस्त घोषित करने, चौसरा में प्रस्तावित न्यूक्लियर प्लांट का काम रोकने, किसानों को चार गुना मुआवजा देने तथा जिले के विभिन्न क्षेत्रों में ट्यूबवेल खुदवाकर पेयजल व सिंचाई की व्यवस्था सुनिश्चित करने की पुरजोर मांग उठाई।
⚖️ शिवराज सिंह चौहान का दिया उदाहरण: नोटिस पर बोले- 13 अक्टूबर के बाद देंगे जवाब
भाजपा जिला अध्यक्ष द्वारा जारी किए गए नोटिस पर प्रतिक्रिया देते हुए सक्सेना ने कहा कि वे इसका जवाब 13 अक्टूबर के बाद देंगे। उन्होंने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान का उदाहरण देते हुए सवाल उठाया कि जब वरिष्ठ नेता अपने क्षेत्रों में किसानों के समर्थन में प्रदर्शन कर सकते हैं, तो वे किसानों की मांगों को लेकर ज्ञापन क्यों नहीं सौंप सकते। गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए सक्सेना के इस बगावती तेवर और 22 हजार मतों के रिकॉर्ड अंतर से मिली जीत के बाद अब राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं कि उनका अगला कदम क्या होगा।
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