छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में धान खरीदी की तैयारियों के बीच राजस्व पटवारियों के अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाने से किसानों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। डिजिटल फसल सर्वे में आ रही तकनीकी परेशानियों, वेतन विसंगति, पदोन्नति के मुद्दों और पटवारियों पर की जा रही दंडात्मक कार्रवाई के विरोध में पटवारी संघ ने काम-काज पूरी तरह ठप कर दिया है। इस हड़ताल के कारण जाति-निवास प्रमाण पत्र बनाने, धान की फसल के भौतिक सत्यापन और बाढ़ या आपदा से प्रभावित किसानों को मुआवजा मिलने की प्रक्रिया सहित राजस्व विभाग के कई महत्वपूर्ण काम प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
📱 पीवी ऐप (PV App) और पॉलीगॉन मैपिंग की तकनीकी समस्याओं से नाराज हैं पटवारी: बिना प्रशिक्षण दबाव का आरोप
राजस्व पटवारी संघ के अनुसार सरकार द्वारा पुराने भुइयां प्लेटफॉर्म को बंद करके नया पीवी ऐप प्लेटफॉर्म शुरू किया गया है, लेकिन मैदानी स्तर पर काम करने वाले पटवारियों को नए सिस्टम में पॉलीगॉन मैपिंग (Polygon Mapping) जैसे तकनीकी कार्यों का पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं दिया गया है। इसके बावजूद कम समय में काम पूरा करने का भारी दबाव बनाया जा रहा है। जिला अध्यक्ष सुधीर लकरा ने बताया कि जिन खेतों की मैपिंग नहीं हुई है, वहां ऐप के जरिए चिह्नित करने की बजाय सामान्य प्रक्रिया अपनाने की मांग की गई है, लेकिन सुनवाई न होने के कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता चुनना पड़ा है।
⚖️ निलंबन और स्थानांतरण की कार्रवाई वापस लेने की मांग: किसानों के कामकाज पर पड़ सकता है असर
संघ के प्रतिनिधियों ने महासमुंद में पटवारियों के निलंबन और बलौदाबाजार में किए गए स्थानांतरण आदेशों को तुरंत प्रभाव से निरस्त करने की मांग की है। पटवारी बालकृष्ण पवार ने कहा कि वे खुद हड़ताल पर नहीं रहना चाहते, लेकिन बिना संसाधनों और उचित प्रशिक्षण के प्रशासनिक दबाव के कारण उनका कार्य करना कठिन हो गया है। धान खरीदी का समय नजदीक होने के कारण इस हड़ताल से किसानों को प्रमाण पत्र बनवाने और फसल सत्यापन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है, जिससे प्रशासनिक स्तर पर सुगबुगाहट तेज हो गई है।
What do you feel about this post?
Like
Love
Happy
Haha
Sad