उज्जैन: मिठाई की दुकानों पर दिखने वाली चमक अब जल्द ही इतिहास बन सकती है। उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने खाद्य सुरक्षा विभाग की सलाहकार समिति की बैठक में मिठाइयों पर लगाए जाने वाले ‘चांदी के वर्क’ को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने का निर्देश दिया है। प्रशासन का उद्देश्य उपभोक्ताओं को पूरी तरह सुरक्षित और मिलावट-मुक्त खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना है।
⚠️ क्यों हानिकारक है मिलावटी चांदी वर्क?
विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में उपलब्ध सस्ता चांदी वर्क अक्सर शुद्ध नहीं होता। इसमें एल्युमिनियम, लेड (शीशा) और कैडमियम जैसी भारी धातुओं की मिलावट हो सकती है। इनका लगातार सेवन लिवर, किडनी, नर्वस सिस्टम को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है और अल्सर जैसी पाचन संबंधी समस्याएं पैदा कर सकता है।
🧪 असली और नकली वर्क की पहचान कैसे करें?
आप घर पर इन आसान तरीकों से वर्क की शुद्धता की जांच कर सकते हैं:
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रगड़ने का परीक्षण: वर्क को उंगलियों के बीच रगड़ें। शुद्ध चांदी उंगलियों में पूरी तरह समा जाएगी, जबकि मिलावटी वर्क टूटकर टुकड़ों में बिखर जाएगा या काला पड़ जाएगा।
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जलाने का परीक्षण: वर्क को आग के पास लाएं। शुद्ध चांदी जलकर छोटी सफेद गेंद बन जाएगी, जबकि एल्युमिनियम मिश्रित वर्क काला पड़कर राख जैसा हो जाएगा।
📋 प्रशासन की सख्ती: त्योहार का इंतज़ार नहीं, अब लगातार होगी सैंपलिंग
कलेक्टर ने खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को स्पष्ट किया है कि वे केवल त्योहारों के समय ही सक्रिय न रहें। पूरे साल सैंपलिंग की कार्रवाई जारी रहनी चाहिए। इस वित्तीय वर्ष में विभाग ने लक्ष्य से 122 प्रतिशत अधिक (513 सैंपल) लिए हैं। अब स्कूलों में भी स्वस्थ खानपान को लेकर जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
🤝 विक्रेताओं के साथ होगी विशेष बैठक
प्रशासन जल्द ही सभी मिठाई विक्रेताओं और कैटरिंग व्यवसायियों के साथ बैठक आयोजित करेगा। कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि उज्जैन से ही इस सकारात्मक पहल की शुरुआत की जानी चाहिए, जिससे मिठाइयों में चांदी वर्क का उपयोग पहले न्यूनतम हो और फिर इसे पूरी तरह समाप्त कर दिया जाए।
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