जमशेदपुर: बिष्टुपुर स्थित टाटा जूलॉजिकल पार्क में उस समय शोक की लहर दौड़ गई, जब वहां की मशहूर शेरनी ‘जोया’ ने अंतिम सांस ली। जोया 16 वर्ष की थी और काफी समय से बीमार चल रही थी। जू प्रबंधन के अनुसार, उसकी मौत एक जन्मजात बीमारी के कारण हुई है।
🌍 अफ्रीका से आई थी जोया
जोया उन पांच जंगली जानवरों (दो नर शेर और तीन मादा शेरनी) में शामिल थी, जिन्हें साल 2012 में अफ्रीका से जमशेदपुर टाटा जूलॉजिकल पार्क लाया गया था। सभी सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए इन शेरों को पार्क में रखा गया था और उनका विशेष ध्यान रखा जाता था। जोया उन पांचों में काफी चर्चित थी, और अब उसकी मृत्यु के बाद जू प्रशासन ने वन विभाग और ‘जू अथॉरिटी ऑफ इंडिया’ को सूचित कर दिया है।
🩺 पोस्टमार्टम के बाद किया गया अंतिम संस्कार
टाटा जूलॉजिकल पार्क के डायरेक्टर नईम अख्तर ने जानकारी दी कि जोया जन्मजात बीमारी से ग्रसित थी। स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद उसका उपचार किया जा रहा था, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। प्रोटोकॉल के अनुसार, शव का पोस्टमार्टम कराया गया और उसके बाद विधि-विधान से उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
🌳 टाटा स्टील द्वारा संचालित है पार्क
टाटा जूलॉजिकल पार्क एक गैर-सरकारी पार्क है, जिसका संचालन और रखरखाव टाटा स्टील द्वारा किया जाता है। यहाँ ‘जू अथॉरिटी ऑफ इंडिया’ की गाइडलाइंस का कड़ाई से पालन किया जाता है। वर्तमान में इस पार्क में मांसाहारी, शाकाहारी जंगली जानवरों और पक्षियों सहित लगभग 370 वन्य प्राणी मौजूद हैं।
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