रांची: झारखंड पुलिस विभाग में एक बड़ा संगठनात्मक बदलाव किया गया है। अब राज्य की एंटी-टेररिज्म स्क्वाड (ATS) पूरी तरह से अपराध अनुसंधान विभाग (CID) के अधीन काम करेगी। डीजीपी तदाशा मिश्रा ने इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी करते हुए एटीएस को लेकर पहले जारी किए गए सभी निर्देशों को विलोपित कर दिया है।
⚖️ क्या है नया प्रशासनिक ढांचा?
नए आदेशानुसार, झारखंड एटीएस अब प्रशासनिक, अनुसंधान, जांच और परिचालन समन्वय के लिए पूरी तरह से सीआईडी के निर्देशन में काम करेगी। हालांकि, आतंकवाद विरोधी अभियानों और आतंकी कृतियों से बचाव के लिए पुलिस अधीक्षक (एटीएस) पुलिस महानिरीक्षक (अभियान) के मार्गदर्शन में काम करना जारी रखेंगे। सीआईडी के प्रमुख ही अब एटीएस के कांडों की निगरानी, पर्यवेक्षण और प्रगति प्रतिवेदन की प्रक्रिया को निर्देशित करेंगे।
🛡️ एटीएस का मुख्य उद्देश्य और गोपनीयता
वर्ष 2015 में गठित झारखंड एटीएस का प्राथमिक उद्देश्य राज्य में आतंकवाद को नियंत्रित करना, स्लीपर सेल का पर्दाफाश करना और आतंकी घटनाओं को रोकना है। डीजीपी के नए निर्देशों में विशेष रूप से जोर दिया गया है कि एटीएस को अपने सभी कार्यों में उच्च स्तरीय गोपनीयता (High Confidentiality) बरकरार रखनी होगी।
🚀 संगठित अपराध पर भी रहेगी नजर
वर्ष 2021 की अधिसूचना के तहत एटीएस को संगठित अपराध के खिलाफ राज्यभर में कार्रवाई करने के लिए भी अधिकृत किया गया है। अब सीआईडी के अधीन आने से एटीएस की जांच प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी व सुव्यवस्थित होने की उम्मीद है, जिससे राज्य में संगठित अपराधियों और राष्ट्र विरोधी तत्वों पर नकेल कसना आसान होगा।
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