सिमडेगा: जिले के कुरडेग प्रखंड में मनरेगा (MGNREGA) योजना के तहत सरकारी राशि की लूट का बड़ा मामला सामने आया है। कुटमाकच्छार पंचायत में बिचौलियों और कुछ कर्मियों की मिलीभगत से फर्जी जॉब कार्ड बनाकर लाखों रुपये की अवैध निकासी की गई है। योजना की मूल भावना को ताक पर रखकर किए गए इस फर्जीवाड़े ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
📊 कैसे हुआ फर्जीवाड़ा?
मामला तब खुला जब मजदूर नितेश कुमार सिंह और उनकी पत्नी मोनिका सिंह के नाम पर फर्जी तरीके से जॉब कार्ड बदले गए।
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पहला कदम: नितेश सिंह के नाम से सामान्य वर्ग में जॉब कार्ड बनाकर 25,380 रुपये निकाले गए।
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दूसरा कदम: बाद में इसी कार्ड को ‘डिलीट’ कर उन्हें अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्शाकर नया कार्ड बनाया गया और फिर से 27,072 रुपये निकाल लिए गए। यही प्रक्रिया उनकी पत्नी के साथ भी अपनाई गई। ग्रामीणों का आरोप है कि कुरडेग प्रखंड में ऐसे सौ से अधिक मामले हैं, जहाँ एक ही व्यक्ति के नाम पर अलग-अलग वर्ग के जॉब कार्ड बनाकर सरकारी खजाने को चूना लगाया जा रहा है।
⚖️ क्या कहता है अधिनियम?
मनरेगा अधिनियम 2005 की धारा-25 के तहत वैध कार्ड को हटाकर फर्जी कार्ड बनाना गंभीर धोखाधड़ी और वित्तीय अनियमितता है। ऐसे कृत्यों में संलिप्त अधिकारियों या कर्मियों को तत्काल निलंबित करने का प्रावधान है।
👮 जांच के दायरे में जिम्मेदार
उप विकास आयुक्त दीपांकर चौधरी ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा, “किसी भी व्यक्ति का केवल एक ही बार जॉब कार्ड बन सकता है। यदि गलत जानकारी भरकर राशि की निकासी की गई है, तो यह स्पष्ट तौर पर जांच का विषय है। मनरेगा एक्ट के तहत दोषी पाए जाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”
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