Sidhi News: आवारा और पालतू कुत्तों का आतंक, 2025 में डॉग बाइट के डरावने आंकड़े आए सामने; प्रशासन ने 300 को लगाया टीका।

मध्य प्रदेश

सीधी: मध्य प्रदेश के सीधी में वर्ष 2025 के दौरान रेबीज संक्रमण और डॉग बाइट के मामलों में तेजी से वृद्धि दर्ज की गई है. एक ओर लोग शौक के तौर पर बाहर से महंगी और नई-नई नस्लों के कुत्ते मंगवाकर घरों में पाल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुत्तों से फैलने वाली खतरनाक बीमारी रेबीज को लेकर चिंता भी बढ़ती जा रही है.

रेबीज से आक्रामक हो रहे कुत्ते
रेबीज एक जानलेवा वायरल बीमारी है, जो संक्रमित कुत्ते के काटने से इंसानों में फैलती है. पशु चिकित्सक डॉ. के.के. पांडे के अनुसार, ”जब रेबीज का संक्रमण कुत्ते में सक्रिय होता है, तो यह उसके नर्वस सिस्टम पर सीधा हमला करता है. इससे कुत्ते का मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है और वह असामान्य रूप से आक्रामक व हिंसक हो जाता है. ऐसे कुत्ते बिना किसी उकसावे के लोगों पर हमला कर सकते हैं.”

डॉ. पांडे ने बताया कि, ”2025 में डॉग बाइट के मामले लगातार सामने आ रहे हैं. लोग अपने पालतू कुत्तों को समय-समय पर टीकाकरण के लिए अस्पताल ला रहे हैं. पूरे वर्ष में 300 से अधिक कुत्तों को पशु चिकित्सालय लाया गया, जहां उन्हें रेबीज का टीका लगाया गया ताकि संक्रमण से बचाव हो सके.”

वहीं, सीधी जिले की सीएमएचओ डॉ. बबीता खरीदने ने बताया कि, ”वर्ष 2025 में जिले में डॉग बाइट के करीब 1000 से अधिक मामले सामने आए हैं. स्वास्थ्य विभाग के पास पर्याप्त मात्रा में रेबीज वैक्सीन उपलब्ध है. डॉग बाइट के शिकार लोगों को रेबीज के साथ-साथ टिटनेस का टीका भी लगाया जा रहा है, ताकि किसी प्रकार की जटिलता न हो.”

रेबीज से संक्रमित कुत्ते के लक्षण
डॉ. के.के. पांडे के अनुसार, ”संक्रमित कुत्ते में अत्यधिक आक्रामकता, बिना कारण काटने की प्रवृत्ति, मुंह से झाग निकलना, पानी से डरना, बेचैनी, लगातार भौंकना और दिशा भ्रम जैसे लक्षण दिखाई देते हैं.” यदि आपको कुत्ता या जंगली जानवर काट ले तो सबसे पहले काटने वाली जगह को साफ पानी से अच्छी तरह धो लेना चाहिए. जख्म पर कोई भी देशी दवाई नहीं लगाए, बल्कि डॉक्टर को दिखाना चाहिए.

कुत्ते के काटने पर क्या करें
यदि किसी व्यक्ति को कुत्ता काट ले, तो तुरंत घाव को साबुन और साफ पानी से कम से कम 10–15 मिनट तक धोना चाहिए. इसके बाद बिना देरी किए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र जाकर रेबीज और टिटनेस का टीका लगवाना जरूरी है.”

बचाव के उपाय
पालतू कुत्तों का नियमित टीकाकरण कराएं, आवारा कुत्तों से दूरी बनाए रखें और बच्चों को कुत्तों के साथ सावधानी बरतने के लिए जागरूक करें. समय रहते सावधानी ही रेबीज जैसी घातक बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है. पालतू कुत्तों का नियमित टीकाकरण कराएं, आवारा कुत्तों से दूरी बनाए रखें और बच्चों को कुत्तों के साथ सावधानी बरतने के लिए जागरूक करें. समय रहते सावधानी ही रेबीज जैसी घातक बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है.

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