हाल ही में तुर्की से भारत लाए गए अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्कर मोहम्मद सलीम डोला इन दिनों सुर्खियों में हैं. जांच एजेंसियों को इसकी काफी समय से तलाश थी. उसे 26 अप्रैल को इस्तांबुल में हिरासत में लिया गया था. जांच एजेंसियों के मुताबिक वह तुर्की में फर्जी पहचान के साथ रह रहा था. सलीम डोला ने तुर्की में अपनी पहचान बदल ली और वह हमजा नाम से वहां एक बुल्गारियाई पासपोर्ट पर रह रहा था. हालांकि यह जांच की जा रही है कि यह पासपोर्ट असली था या फर्जी.
दाऊद का करीबी और हिंदुस्तान समेत कई देशों में D कंपनी के ड्रग नेटवर्क को ऑपरेट करने वाले सलीम डोला को ट्रैक करना इतना आसान नहीं था- पिछले कई सालों से भारतीय जांच एजेंसियां इंटरपोल की मदद से सलीम डोला को ट्रैक करने में लगी थी. इस ऑपरेशन से जुड़े अधिकारियों की माने तो डोला को खोजना भूसे में सुई तलाशने जैसा था- लेकिन सलीम डोला की एक छोटी सी गलती ने ही उसे सलाखों के पीछे पहुंचा दिया.
एक गलती पड़ी भारी
आप सोच रहे होंगे कि आख़िर वो कौन सी गलती थी जिसने दाऊद के सबसे करीबी सलीम डोला को हाइडआउट से निकाल कर दुनिया के सामने एक्सपोज़ कर दिया. तो चलिए आपको बताते हैं.
जांच एजेंसी से जुड़े सूत्रों का दावा है कि सलीम डोला भारतीय एजेंसियों के डर से इंस्तांबुल भाग गया था, वहां डोला ने ख़ुद को अंडरग्राउंड कर लिया था. या यूं कहें कि ख़ुद को एक तरह से हाउस अरेस्ट कर लिया था और बाहरी दुनिया से संपर्क पूरी तरह खत्म कर दिया था.
कमरे से बाहर नहीं निकलता था डोला
सलीम डोला इस्तांबुल में डेढ़ साल से अपने कमरे से बाहर नहीं निकला था और ना ही सीधे तौर पर किसी से संपर्क करता था ताकि भारतीय जांच एजेंसियां और इंटरपोल उसे ट्रैक ना कर पाएं. लेकिन कुछ दिन पहले डोला ने एक बहुत बड़ी गलती कर दी. उसको अंदेशा भी नहीं था कि उसकी ये गलती उसे सलाखों के पीछे पहुंचा देगी. दरअसल, डोला ने एक कुरियर अपने हाइडआउट के पते पर मंगवा लिया और वहीं से भारतीय एजेंसियों ने इंटरपोल की मदद से डोला को ट्रैक कर लिया.
डोला के पास से बरामद हुए तीन पासपोर्ट
इसके बाद तुरंत इसकी जानकारी इंस्तांबुल पुलिस को दी गई, इंस्तांबुल पुलिस ने डोला के कमरे पर छापा मारा. जहां से तलाशी के दौरान तीन पासपोर्ट बरामद हुए, जिनमें से एक पासपोर्ट बुल्गारिया और दो भारतीय पासपोर्ट बरामद हुए. बुल्गारिया के पासपोर्ट में उसका नाम हमज़ा लिखा हुआ था. उसके बाद भारतीय विदेश मंत्रालय की मदद से शुरू हुआ ऑपरेशन ग्लोबल हंट, जिसके तहत तुर्की से प्रत्यर्पण संधि ना होने के बावजूद उसे भारत वापस लाने में सफलता मिली.
ड्रग तस्करी का ट्रांजिट रूट था तुर्की
सूत्रों माने तो सलीम डोला तुर्की को ड्रग तस्करी के लिए ट्रांजिट रूट की तरह इस्तेमाल कर रहा था. क्यूंकि तुर्की एशिया-यूरोप और मिडिल ईस्ट के बीच में हैं. एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक उसका नेटवर्क दुनिया के कई देशों तक फैला था और दुनिया के कई अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्कर उसके सिंडिकेट का हिस्सा बन चुके थे जो लगातार सिंथेटिक ड्रग्स जैसे MDMA की सप्लाई को रिमोट तरीके से कंट्रोल कर रहा था सिर्फ डोला ही नहीं उसके परिवार के सभी लोग इसी ड्रग के धंधे में लगे थे. जून 2025 में सलीम डोला के बेटे ताहिर डोला को भी संयुक्त अरब अमीरात से भारत लाया गया था. वहीं उसके एक और सहयोगी को भी दुबई से प्रत्यर्पित कर गिरफ्तार किया गया था.
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