कुदरत की मार! दियारा में बारिश और तूफान से रबी फसलें बर्बाद; खून के आंसू रो रहा किसान, सरकार से लगाई मुआवजे की गुहार

झारखण्ड

साहिबगंज: जिले में एक बार फिर प्राकृतिक आपदा ने किसानों को गहरी चोट पहुंचाई है. जिले के दियारा इलाके में सैकड़ों एकड़ रबी फसल आंधी और बारिश से बर्बाद हो गई है. किसान लंबे समय से ऐसी आपदाओं से जूझते आ रहे हैं, लेकिन सरकार और जिला प्रशासन की ओर से केवल सांत्वना के अलावा कोई ठोस मुआवजा नहीं मिल पाता, जिससे वे हर बार ठगा हुआ महसूस करते हैं.

बेमौसम बारिश ने मचाई तबाही

बीते दिनों रात में आई बेमौसम बारिश, आंधी और तूफान ने किसानों के लिए भारी तबाही मचाई. गंगा किनारे के क्षेत्रों में सैकड़ों एकड़ में लगी मक्का की फसल तेज हवाओं से गिरकर जमीन पर बिछ गई. इन पौधों में दाना बन चुका था और कुछ दिनों में पकने के बाद कटाई होनी थी, लेकिन आपदा ने फसल को पूरी तरह जवाब दे दिया. किसान अपनी फसल देखकर बेहद चिंतित हैं और अपनी किस्मत पर आंसू बहा रहे हैं.

सदर प्रखंड के 11 पंचायतों में सबसे अधिक क्षति

सदर प्रखंड के 11 पंचायतों में भारी नुकसान हुआ है. इनमें गंगा प्रसाद पूर्व, किसन प्रसाद, रामपुर दियारा, लालबथानी उत्तर व दक्षिण, गंगा प्रसाद पूर्व मध्य, सकरीगाली और हाजीपुर दियारा प्रमुख हैं. मक्का के अलावा गेहूं और सरसों की फसलों को भी काफी क्षति पहुंची है.

किसानों ने मुआवजे की मांग की

स्थानीय किसानों ने बताया कि लालबथानी सरपंच टोला में ही 50 बीघा से अधिक मक्का फसल जमीन पर गिर गई. कटाई का समय नजदीक था, लेकिन प्राकृतिक आपदा ने सब कुछ बर्बाद कर दिया. बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में खरीफ सीजन में मक्का डूब जाता है, जबकि रबी सीजन में ऐसी आपदा से फसल गिरकर बर्बाद हो जाती है. किसानों ने सरकार से हर संभव मदद और उचित मुआवजे की गुहार लगाई है.

जिला परिषद के उपाध्यक्ष सुनील यादव ने कहा कि किसानों की बर्बाद फसल देखकर वे काफी दुखी और मर्माहत हैं. उन्होंने जिला प्रशासन से मिलकर किसानों को क्षतिपूर्ति दिलाने का आश्वासन दिया है. सुनील यादव ने बताया कि बेमौसम बारिश ने खेतों में खड़ी मक्का फसल को पूरी तरह तबाह कर दिया. फसल कुछ दिनों में कटकर घर पहुंचने वाली थी, लेकिन आपदा ने सब कुछ निगल लिया.

किसान अब जिला प्रशासन से उम्मीद लगाए बैठे हैं कि कोई अधिकारी आए और उनकी मेहनत का कुछ हिस्सा कम से कम मुआवजे के रूप में मिले. अभी तक किसी भी पदाधिकारी या कर्मचारी द्वारा नुकसान का संज्ञान नहीं लिया गया है, जिससे किसानों में गुस्सा और नाराजगी बढ़ रही है.

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