नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल को ‘लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार 2026’ से सम्मानित करते हुए उनकी देश सेवा की भूरि-भूरि प्रशंसा की।
समारोह को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा, “जब भी भारत का इतिहास लिखा जाएगा और कोई आंतरिक व बाहरी सुरक्षा का विश्लेषण करेगा, तो जाहिर तौर पर अजीत डोभाल जी के योगदान के लिए एक स्वर्णिम पृष्ठ सुरक्षित रखना होगा; इसमें रत्ती भर भी संदेह नहीं है।”
गृह मंत्री ने अपने संबोधन का शुभारंभ लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए किया। उन्होंने तिलक जी को स्वतंत्रता संग्राम की दिशा बदलने वाला ‘युग पुरुष’ करार दिया और कहा कि उन्होंने ‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है’ का अमर मंत्र देकर करोड़ों देशवासियों में राष्ट्रभक्ति की अलख जगाई थी।
⚔️ शाह ने तिलक की ‘निडरता’ की तुलना डोभाल की ‘ऑपरेशनल उत्कृष्टता’ से की
गृह मंत्री ने लोकमान्य तिलक के ऐतिहासिक साहस और वैचारिक निडरता की तुलना NSA अजीत डोभाल की कार्यकुशलता व ऑपरेशनल उत्कृष्टता से की।
उन्होंने रेखांकित किया कि तिलक महाराज ने गणेशोत्सव और शिवाजी जन्मोत्सव की शुरुआत करके जिस ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद’ (Cultural Nationalism) की नींव रखी थी, आज पूरा देश उसी मार्ग पर आगे बढ़ रहा है।
💣 2008 अहमदाबाद ब्लास्ट का किस्सा: “डोभाल की एक सलाह से सुलझे थे देश भर के 13 सीरियल बम ब्लास्ट”
गुजरात के गृह मंत्री के रूप में अपने पुराने दिनों को याद करते हुए अमित शाह ने एक महत्वपूर्ण संस्मरण साझा किया।
उन्होंने बताया, “गुजरात में जब सीरियल बम ब्लास्ट हुए थे, तब मेरी अजीत डोभाल जी से कोई निजी पहचान नहीं थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने कहा था कि यह सिर्फ एक साधारण धमाका नहीं है, इसके तार पूरे देश से जुड़े हैं। उन्होंने मुझे अजीत डोभाल जी को बुलाकर अधिकारियों के साथ चर्चा करने की सलाह दी।”
शाह ने आगे कहा, “मुझे अच्छी तरह याद है कि अजीत डोभाल जी मेरे आवास पर आए थे। दोपहर के समय उन्होंने जो रणनीतिक टिप्स दी थीं, उसी का परिणाम था कि गुजरात पुलिस ने न सिर्फ अहमदाबाद ब्लास्ट, बल्कि देश भर में हुए 13 सीरियल बम धमाकों की गुत्थी को एक साथ सुलझा लिया था—जो कि भारतीय पुलिस इतिहास की बहुत बड़ी उपलब्धि थी।”
🛡️ “कमजोर नीति से ‘मजबूत रीढ़’ वाली विदेश नीति का सफर”, डोभाल के योगदान की सराहना
अमित शाह ने बल देकर कहा कि वर्ष 2014 से पूर्व भारत की विदेश नीति में जिस दृढ़ता और ‘रीढ़ की हड्डी’ का अभाव दिखता था, उसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मजबूत नेतृत्व और NSA अजीत डोभाल की दूरदर्शिता ने एक ‘मजबूत रीढ़’ में बदल दिया है।
उन्होंने कहा कि 2014 में प्रधानमंत्री बनते ही नरेंद्र मोदी ने अपनी पहली नियुक्ति के रूप में अजीत डोभाल को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार चुना था। आज भारत ने वैश्विक पटल पर अपने आत्म-सम्मान के साथ-साथ कूटनीतिक स्थिति को अभूतपूर्व रूप से सशक्त किया है।
🌟 “सिर्फ सम्मान नहीं, आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणापुंज है यह पुरस्कार”
गृह मंत्री ने कहा कि ‘लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार’ जैसे सम्मान मात्र औपचारिकता या दिखावा नहीं हैं, बल्कि यह देश सेवा के लिए समर्पण की एक अखंड धारा का निर्माण करते हैं।
आज अजीत डोभाल को प्रदान किया गया यह प्रतिष्ठित सम्मान देश के लिए जीने वाले, रात-दिन राष्ट्ररक्षा में समर्पित सुरक्षाकर्मियों और हर क्षेत्र के नागरिकों के लिए एक महान प्रेरणास्रोत सिद्ध होगा।
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