जबलपुर: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक दशक (10 साल) से लापता एक युवती के मामले में बेहद भावुक और यथार्थवादी टिप्पणी की है। हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस विजय शुक्ला की युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि, “140 करोड़ की आबादी वाले देश में 10 साल पहले लापता हुए व्यक्ति को खोजना एक अत्यंत कठिन कार्य है।”
👧 2016 में लापता हुई थी सीताराम की बेटी
जबलपुर निवासी सीताराम बर्मन ने साल 2024 में हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। सीताराम का कहना है कि उनकी 17 वर्षीय बेटी जुलाई 2016 में लापता हो गई थी। 10 साल बीत जाने के बाद भी पुलिस उसका कोई सुराग नहीं लगा पाई है। याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पुलिस से अब तक की कार्रवाई का स्टेटस मांगा था।
🔍 140 करोड़ की आबादी में तलाशना चुनौतीपूर्ण
सुनवाई के दौरान पुलिस ने 21 स्टेटस रिपोर्ट पेश की, जिससे कोर्ट संतुष्ट नजर आया। युगलपीठ ने स्पष्ट किया कि बिना किसी ठोस सुराग के इतने बड़े देश में किसी व्यक्ति को खोजना पुलिस के लिए चुनौती से कम नहीं है। कोर्ट ने यह भी तर्क दिया कि यदि युवती आज जीवित होती, तो वह अब बालिग हो चुकी होती और अपने माता-पिता या किसी परिचित से संपर्क जरूर कर लेती।
👮 पुलिस को तलाश जारी रखने के निर्देश
युवती का कोई सुराग न मिलने के बावजूद, कोर्ट ने संवेदनशीलता दिखाते हुए पुलिस को अपनी जांच बंद करने का आदेश नहीं दिया। कोर्ट ने निर्देशित किया है कि पुलिस युवती की तलाश जारी रखे। साथ ही, यह आदेश दिया कि यदि युवती का पता चलता है, तो उसे तुरंत उसके पिता (याचिकाकर्ता) के सुपुर्द किया जाए।
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