मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण को लेकर शुक्रवार को हाईकोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने ओबीसी वर्ग को 27 फीसदी आरक्षण देने की मांग को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि राज्य में 14 फीसदी आरक्षण ही लागू रहेगा। कोर्ट ने 13 फीसदी होल्ड पदों पर तीन महीने के भीतर अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने का कड़ा निर्देश भी जारी किया है। इस फैसले से साल 2019 से चल रहे कई न्यायिक मामलों और अटकी हुई भर्तियों पर सीधा असर पड़ेगा।
🏛️ कमलनाथ सरकार के समय से चल रहा था विवाद, सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे निर्देश
तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने अक्टूबर 2019 में मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने की घोषणा कर इसे लागू कर दिया था। इसके बाद यह मामला कानूनी दांवपेच में उलझ गया और पक्ष-विपक्ष की ओर से कई याचिकाएं दायर की गईं। मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुँचा था, जहाँ से सभी याचिकाओं की एक साथ सुनवाई के लिए मामले को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट को निर्देशित किया गया था। सुनवाई के दौरान ओबीसी पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने 27 फीसदी आरक्षण को सही ठहराते हुए आबादी से जुड़े आंकड़े रखे थे, लेकिन अंततः अदालत ने इसे खारिज कर दिया।
👨🏫 शिक्षक, पीएससी और पुलिस भर्ती के होल्ड पदों पर पड़ेगा असर
इस फैसले का सीधा असर उन तमाम सरकारी भर्तियों और नियुक्तियों पर पड़ेगा जो 27 फीसदी आरक्षण विवाद के चलते पिछले कई महीनों और सालों से लंबित थीं। खासकर शिक्षक भर्ती, राज्य सेवा परीक्षा (PSC), पटवारी और पुलिस विभाग की कई परीक्षाओं में 13 फीसदी पद होल्ड पर रखे गए थे। चयनित शिक्षक संघ और अन्य अभ्यर्थियों का कहना है कि इस फैसले के बाद कई होल्ड पद जनरल कैटेगरी में चले जाएंगे, जिससे लंबे समय से नियुक्ति का इंतजार कर रहे उम्मीदवारों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
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