बठिंडा: जिले में कृषि व्यवस्था, पर्यावरण और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिला मैजिस्ट्रेट राजेश धीमान ने एक सख्त आदेश जारी किया है। इसके तहत जिले की सीमा के भीतर शाम 6 बजे से लेकर अगले दिन सुबह 10 बजे तक कंबाइनों से धान की कटाई पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही, धान की फसल काटने के बाद खेतों में बची धान की नाड़, पराली और अन्य अवशेषों (Crop Residue) को आग लगाने पर भी कड़ा प्रतिबंध लगा दिया गया है। प्रशासन के ये आदेश आगामी 16 नवंबर तक लागू रहेंगे।
🌍 पराली जलाने से मिट्टी और पर्यावरण को होता है भारी नुकसान
प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि धान की नाड़, पराली और फसल अवशेषों को जलाने से मिट्टी के अंदर मौजूद उपयोगी जैविक पदार्थ (Organic Matter) पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं, जिससे भूमि की उर्वरा शक्ति (Soil Fertility) पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है।
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सुरक्षा को खतरा: इसके अलावा, खेतों में आग लगने की घटनाओं से आसपास के खड़े खेतों की फसल, गोदामों में रखी फसल तथा सैन्य या अन्य गोला-बारूद के डिपो तक आग पहुंचने का गंभीर खतरा बना रहता है, जिससे बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हो सकता है।
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स्वास्थ्य पर असर: फसल अवशेषों को जलाने से निकलने वाला जहरीला धुआं वातावरण को प्रदूषित करता है। इससे वायु प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ता है और आम नागरिकों को सांस संबंधी गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है। इन्हीं तमाम गंभीर कारणों को ध्यान में रखते हुए यह सख्त कदम उठाया गया है।
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