धमतरी: जिले के ग्राम बारना में कुम्हार समाज अपनी पारंपरिक आजीविका को बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है। समाज के प्रतिनिधियों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया है कि उनके पारंपरिक व्यवसाय के लिए वर्ष 2008 में आरक्षित की गई भूमि को अब खेल मैदान के रूप में उपयोग करने की साजिश रची जा रही है। समाज का कहना है कि ऐसा होने से उनकी आजीविका और सांस्कृतिक पहचान दोनों पर संकट खड़ा हो जाएगा।
📜 क्या है पूरा मामला?
वर्ष 2008 में ग्राम बारना में खसरा नंबर 514/2 (1.84 हेक्टेयर) भूमि कुम्हार समाज के पारंपरिक व्यवसाय (मिट्टी के बर्तन बनाने) के लिए आरक्षित की गई थी। वहीं, खेल मैदान के लिए खसरा नंबर 514/3 (2 हेक्टेयर) भूमि पहले से ही निर्धारित है। समाज का आरोप है कि ग्राम पंचायत और कुछ ग्रामीणों द्वारा अब कुम्हार समाज की आरक्षित भूमि पर खेल मैदान विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है, जो कि गलत और नियमानुसार नहीं है।
👨🌾 समाज की पारंपरिक पहचान है दांव पर
कुम्भकार समाज के जिलाध्यक्ष गगन कुम्भकार का कहना है कि यह जमीन केवल व्यवसाय का जरिया नहीं, बल्कि उनकी संस्कृति का आधार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उक्त भूमि से उन्हें मिट्टी और अन्य संसाधन मिलते हैं। यदि इस भूमि का उपयोग अन्य कार्य के लिए किया जाता है, तो समाज के लोगों और आने वाली पीढ़ियों के लिए अपनी पारंपरिक कला को जीवित रखना कठिन हो जाएगा।
🏛️ प्रशासन का आश्वासन
अपर कलेक्टर इंदिरा सिंह ने कुम्हार समाज के प्रतिनिधियों की बातों को गंभीरता से सुना। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और सभी पक्षों को सुनने के बाद ही नियमानुसार उचित निर्णय लिया जाएगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि आरक्षित भूमि से जुड़े किसी भी मामले में तथ्यों के आधार पर ही कार्रवाई की जाएगी।
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