अमृतसर: शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज के समक्ष पेश होकर अपना पक्ष रखा है। अपने इस्तीफे की चर्चाओं और अकाल तख्त साहिब से जुड़े विभिन्न मामलों पर धामी ने मीडिया के सामने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उन्होंने कभी भी मर्यादा के खिलाफ कोई कार्य नहीं किया है।
📋 क्या है 7-सदस्यीय कमेटी का विवाद?
एडवोकेट धामी ने बताया कि 2 दिसंबर 2024 को शिरोमणि अकाली दल की भर्ती के लिए 7 सदस्यीय कमेटी का गठन हुआ था, जिसमें उनका नाम भी शामिल था। उन्होंने बताया कि निजी कारणों से उन्होंने उस समय के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह को पत्र लिखकर अपना नाम वापस लेने की सूचना दी थी। धामी ने स्पष्ट किया कि उन्होंने अपना इस्तीफा उस समय के PA जसपाल सिंह को सौंप दिया था, जिसे अब गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।
⚖️ अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्चता सर्वोपरि
प्रधान धामी ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्चता सर्वोपरि है और सिंह साहिबानों द्वारा लिया गया हर फैसला हर सिख के लिए शिरोधार्य है। उन्होंने अपने विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा कि मीडिया में उनके बारे में जो खबरें चलाई जा रही हैं, वे भ्रामक हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि वे अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार के सामने पूरी स्थिति रख चुके हैं, और अब जो भी आदेश वहां से जारी होगा, उसे पंथक तरीके से लागू किया जाएगा।
🗣️ भविष्य के खुलासे और राजनीतिक टिप्पणी
इस दौरान उन्होंने भगवंत मान सरकार और वर्तमान राजनीतिक स्थितियों पर भी संक्षिप्त टिप्पणी की। धामी ने वादा किया कि 7 सदस्यों वाली कमेटी के मामले में वे आने वाले समय में कुछ और महत्वपूर्ण तथ्य सार्वजनिक करेंगे। उन्होंने दोहराया कि उनका रुख स्पष्ट है और वे किसी भी तरह की गलतफहमी के शिकार नहीं हैं, बल्कि पंथ और अकाल तख्त साहिब की मर्यादा बनाए रखने के लिए संकल्पित हैं।
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