ग्वालियर: राजधानी लखनऊ में हुए कोचिंग अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है, लेकिन ग्वालियर में स्थिति अभी भी बदतर बनी हुई है। शहर के अलग-अलग इलाकों में धड़ल्ले से चल रही सैकड़ों कोचिंग संस्थानों में से केवल तीन के पास ही नगर निगम की फायर एनओसी (Fire NOC) है। अधिकांश संस्थानों में न तो फायर फाइटिंग सिस्टम मौजूद हैं और न ही आपातकालीन निकास की कोई उचित व्यवस्था।
⚠️ कागजों तक सिमटकर रह गया जांच अभियान
नगर निगम के अधिकारी इस लापरवाही से भली-भांति परिचित हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति होती है। जब भी देश के किसी अन्य हिस्से में आगजनी की बड़ी घटना होती है, तो निगम का फायर अमला कुछ दिनों के लिए सक्रिय होता है और फिर पूरा अभियान ठंडे बस्ते में चला जाता है। आलम यह है कि पिछले 10 दिनों से ग्वालियर में सुरक्षा जांच का अभियान पूरी तरह से ठप पड़ा हुआ है।
👨👩👧👦 अभिभावकों की अनदेखी और सुरक्षा का खतरा
कोचिंग के चयन के समय अक्सर अभिभावक केवल शिक्षण संस्थानों के परिणामों और लोकप्रियता पर ध्यान देते हैं, सुरक्षा मानकों की जांच करना भूल जाते हैं। संकरी सीढ़ियां, सीमित निकास द्वार, लकड़ी के पार्टिशन और अत्यधिक भीड़भाड़ किसी भी दुर्घटना के समय मौत का जाल साबित हो सकती है। प्रशासन के पास भी शहर में चल रहे सभी कोचिंग संस्थानों का कोई सटीक और समग्र डेटाबेस उपलब्ध नहीं है।
⚖️ कब जागेगा नगर निगम?
पिछले दिनों होटल अग्निकांड के बाद निगम ने सिटी सेंटर स्थित एक कोचिंग पर कार्रवाई की थी, लेकिन वह भी केवल एक सांकेतिक कदम साबित हुई। टोपी बाजार और मोर बाजार के कुछ प्रतिष्ठानों के बाद निगम की सक्रियता गायब हो गई है। कोचिंग संचालकों की लापरवाही और निगम की ढुलमुल नीति के बीच ग्वालियर के हजारों छात्रों की जान एक अनिश्चित खतरे में है।
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