भोपाल: मध्य प्रदेश में हालिया प्रशासनिक फेरबदल के बाद कई सरकारी विभागों में वरिष्ठता (Seniority) को लेकर विवाद गहरा गया है। कई स्थानों पर पदानुक्रम के नियमों को दरकिनार कर जूनियर अधिकारियों को सीनियर पदों पर पदस्थ कर दिया गया है। स्थिति यह है कि अब कनिष्ठ अधिकारी अपने ही वरिष्ठ अधिकारियों की गोपनीय रिपोर्ट (CR) लिखने की स्थिति में आ गए हैं, जिसे लेकर कर्मचारियों में भारी रोष है।
🏢 एमएसएमई और कृषि विभाग में वरिष्ठता की अनदेखी
विवाद की शुरुआत कृषि विभाग से हुई थी, जो अब एमएसएमई विभाग तक पहुँच गया है। एमएसएमई में 2016-2019 बैच के 60 से अधिक योग्य वर्ग-2 राजपत्रित अधिकारी उपलब्ध होने के बावजूद, निचले स्तर के प्रभारी प्रबंधकों को जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्रों का ‘महाप्रबंधक’ (GM) बना दिया गया है। यह निर्णय विभागीय वरिष्ठता क्रम के लिए एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
🚧 एक ही पद पर दो नियुक्तियां और नियमों का उल्लंघन
लोक निर्माण विभाग (PWD) और वाणिज्यिक कर विभाग में तो प्रशासनिक अव्यवस्था इस कदर है कि कई स्थानों पर एक ही पद पर दो-दो अधिकारियों की पोस्टिंग कर दी गई है। इंदौर में चीफ इंजीनियर योगेंद्र कुमार को उनके मूल पद से दो स्तर ऊपर का प्रभार देने पर वरिष्ठ अधिकारियों ने आपत्ति दर्ज की है। हालांकि, ग्रामीण विकास विभाग में कड़े विरोध के बाद शासन ने कुछ नियमों में सुधार किया है, लेकिन अन्य विभागों में स्थिति अभी भी असमंजस भरी बनी हुई है।
📜 सिविल सेवा नियमों के खिलाफ प्रशासनिक गड़बड़ियां
प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह पूरी प्रक्रिया ‘मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियम, 1961’ के सिद्धांतों के विपरीत है। ‘सर्विस ज्यूरिसप्रूडेंस’ (Service Jurisprudence) का मूल सिद्धांत यह है कि कोई कनिष्ठ अधिकारी कभी भी अपने वरिष्ठ का नियंत्रण प्राधिकारी नहीं हो सकता। जूनियर को अपने सीनियर की गोपनीय रिपोर्ट लिखने का अधिकार देना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह विभागीय कार्यकुशलता और नैतिकता को भी प्रभावित करता है।
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