Delhi Police Controversy: प्रदर्शनों के दौरान वकीलों और नागरिकों की हिरासत पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, आपातकाल से की गई तुलना

दिल्ली

दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई पर अब कानूनी गलियारों में गंभीर सवाल उठने लगे हैं। भारत के पूर्व अटॉर्नी जनरल और वरिष्ठ अधिवक्ता के.के. वेणुगोपाल ने रविवार को सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे को विशेष रूप से उठाया। उन्होंने अदालत को बताया कि उनकी एक जूनियर महिला सहयोगी, जो सुप्रीम कोर्ट आ रही थीं, उन्हें दिल्ली पुलिस ने मनमाने ढंग से हिरासत में लिया। बिना किसी कारण के उन्हें वैन में बैठाकर घटनास्थल से 11 किलोमीटर दूर छोड़ दिया गया, जिससे वे अदालत नहीं पहुंच सकीं।

🏛️ वकीलों और पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार की आपातकाल से तुलना: सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच के सामने यह मामला उठाया गया, जो दिल्ली में प्रदर्शनों के दौरान बैरिकेडिंग, निवारक हिरासत (Preventive Detentions) और मेट्रो सेवाओं में रुकावटों से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान वकीलों ने राजधानी में लगाए गए अत्यधिक प्रतिबंधों और वकीलों व पत्रकारों के साथ हुए दुर्व्यवहार की तुलना 50 साल पुराने आपातकाल (Emergency) जैसे हालातों से की। इस बीच, दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) ने भी पुलिस के इस रवैये के विरोध में वकीलों से काली रिबन पहनकर अदालत में पेश होने की अपील की है।

🛡️ सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख: पेशेवर कर्तव्यों में बाधा न डालने और हिरासत के कानूनी आधार को स्पष्ट करने के निर्देश

मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि सरकार को इन हिरासतों के हालात, तौर-तरीकों और उनके कानूनी आधार को पूरी तरह उचित ठहराना होगा। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया है कि वकीलों, पत्रकारों और अन्य पेशेवरों को उनके पेशेवर कर्तव्यों का पालन करने से रोके जाने जैसी कार्रवाई स्वीकार्य नहीं है। इस मामले की आगामी सुनवाई में प्रशासन को जवाब पेश करना होगा।

What do you feel about this post?

0%
like

Like

0%
love

Love

0%
happy

Happy

0%
haha

Haha

0%
sad

Sad

0%
angry

Angry