भोपाल (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की जीवनरेखा (लाइफलाइन) कहे जाने वाले ऐतिहासिक ‘बड़े तालाब’ (भोजताल) के अस्तित्व को बचाने के लिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने कड़ा रुख अपनाया है।
एनजीटी (NGT) की सेंट्रल बेंच ने भदभदा क्षेत्र के समीप फुल टैंक लेवल (FTL) की सीमा में डंपरों के जरिए किए जा रहे अवैध मिट्टी भराव पर कड़ा संज्ञान लेते हुए भोपाल नगर निगम, भोपाल कलेक्टर, मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) और पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संगठन (EPCO) को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। वहीं दूसरी ओर, ट्रिब्यूनल की इस सख्त कार्रवाई के बाद नगर निगम ने भी बड़े तालाब की डूब क्षेत्र की जमीन पर कब्जा करने वाले विधायक, पूर्व आईपीएस अधिकारियों और बड़े बिल्डरों व रसूखदार कारोबारियों के नामों की सूची सार्वजनिक कर दी है।
🌊 अवैध मिट्टी भराव को माना गंभीर पर्यावरणीय अपराध, 4 सदस्यीय संयुक्त जांच समिति का गठन
एनजीटी की मध्य क्षेत्रीय पीठ ने बड़े तालाब के एफटीएल क्षेत्र में हो रहे लगातार मिट्टी भराव को पर्यावरण और जलीय चक्र के विरुद्ध एक गंभीर अपराध माना है।
ट्रिब्यूनल का स्पष्ट कहना है कि इस प्रकार के अनधिकृत कृत्यों से विशाल जलाशय के प्राकृतिक स्वरूप और जलीय जीवों के प्राकृतिक आवास पर अत्यंत प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इस पूरे मामले की निष्पक्ष जमीनी जांच के लिए चार सदस्यीय संयुक्त समिति का गठन किया गया है, जिसमें केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राज्य वेटलैंड अथॉरिटी और भोपाल कलेक्टर के प्रतिनिधि शामिल हैं। यह समिति आगामी 6 सप्ताह में अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपेगी, जिस पर एनजीटी में अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी।
📋 रसूखदारों के कब्जों पर रिपोर्ट हुई सार्वजनिक: विधायक विष्णु खत्री, पूर्व IPS और बिल्डरों के पक्के निर्माण शामिल
अतिक्रमणकारियों व रसूखदारों को बचाने के लग रहे आरोपों के बीच नगर निगम प्रशासन ने ट्रिब्यूनल के समक्ष अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है।
निगम द्वारा पेश की गई आधिकारिक सूची में क्षेत्रीय विधायक विष्णु खत्री, उनके निकट संबंधियों, पूर्व आईपीएस अधिकारी मैथिलीशरण गुप्त और शहर के कई नामचीन बिल्डरों-कारोबारियों के पक्के व्यावसायिक निर्माण व मैरिज गार्डन शामिल हैं। नगर निगम ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि बड़े तालाब के जलग्रहण और संवेदनशील क्षेत्र में कुल 303 अवैध निर्माण चिह्नित किए गए हैं, जिनमें से 246 अवैध ढांचों पर अब तक कोई ठोस व प्रभावी प्रशासनिक कार्रवाई नहीं हो सकी है।
⚖️ कानूनी पेच फंसा, टास्क फोर्स समिति करेगी 16 मार्च 2022 से पहले के अवैध निर्माणों पर अंतिम फैसला
नगर निगम द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, चिह्नित 303 अवैध निर्माणों में से 15 मामलों में माननीय हाई कोर्ट से स्थगन आदेश (Stay Order) मिला हुआ है, जबकि 53 निर्माणों को 16 मार्च 2022 से पुराने बताकर एक अलग श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है।
हालांकि, मार्च 2022 से पहले के इन पुराने अवैध कब्जों और पक्के निर्माणों पर आगे क्या दंडात्मक कार्रवाई होगी, इसका अंतिम निर्णय शासन द्वारा गठित टास्क फोर्स समिति करेगी। नगर निगम के चीफ सिटी प्लानर नीरज आनंद लिखार के अनुसार, “यह विशेष समिति जो भी विधिक निर्णय लेगी, उसके आधार पर आगे की कठोर कार्रवाई की जाएगी। वर्तमान में केवल 16 मार्च 2022 के बाद बने अवैध कब्जों को ही ढहाया जा रहा है, जबकि पुरानी संपत्तियों पर समिति के निर्णय के बाद ही आगे का कदम उठाया जाएगा।”
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