रायबरेली में जमीन धंसने से हुआ बड़ा खुलासा, मिली 2000 साल पुरानी ‘कुषाणकालीन नगरी’

उत्तर प्रदेश

रायबरेली (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले से इतिहास, पुरातत्व और शोध प्रेमियों के लिए एक बेहद रोमांचित और अचंभित करने वाली खबर सामने आई है।

हरचंदपुर विकास खंड क्षेत्र स्थित ओई भीट गांव में पिछले दिनों भारी बारिश के कारण जमीन धंसने से एक कथित रहस्यमयी गुप्त सुरंग मिलने की अफवाह फैली थी। हालांकि, जब पुरातात्विक विशेषज्ञों की टीम ने मौके पर पहुंचकर वैज्ञानिक जांच की, तो सुरंग का दावा खारिज हो गया। लेकिन इसके बदले में करीब 2000 वर्ष पुरानी ‘कुषाणकालीन नगरी’ (Kushan Era) के बेहद मजबूत ऐतिहासिक अवशेष और पुरातात्विक साक्ष्य हाथ लगे हैं।

🚜 किसान के खेत में धंसी थी मिट्टी, प्राचीन विशाल ईंटों और दीवारों से खुला राज

दरअसल, गांव के स्थानीय किसान सुशील मौर्या के खेत में तेज मूसलाधार बारिश के बाद अचानक मिट्टी का एक बड़ा हिस्सा नीचे धंस गया था।

जब गड्ढे से मिट्टी नीचे धंसी, तो वहां प्राचीन कालीन बड़ी ईंटों से बनी गहरी बनावट, चौड़ी दीवारें और प्राचीन संरचनाएं दिखाई देने लगीं। स्थानीय ग्रामीणों ने इसे किसी जमाने के राजा-महाराजाओं की गुप्त सुरंग समझ लिया और देखते ही देखते यह खबर पूरे जिले में जंगल की आग की तरह फैल गई, जिसे देखने के लिए लोगों की भीड़ जुटने लगी।

🔎 सुरंग का दावा पूरी तरह खारिज, जांच में मिला 2000 साल पुराना समृद्ध प्राचीन नगर

अफवाहों और मीडिया रिपोर्टों के बाद पुरातत्व विभाग की विशेषज्ञ टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर पूरे क्षेत्र का बारीक निरीक्षण किया।

पुरातत्वविदों ने स्पष्ट कर दिया है कि मौके पर किसी प्रकार के गुप्त रास्ते, तहखाने या सुरंग होने के कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, धंसी हुई जगह पर मिली विशाल लाल ईंटों का आकार, उनकी चिनाई का तरीका और स्थापत्य बनावट लगभग 2000 वर्ष पुरानी यानी कुषाण साम्राज्य (Kushan Dynasty) के दौर की है। यह किसी बड़े समृद्ध प्राचीन नगर, मंदिर परिसर या बड़ी मानव बस्ती का हिस्सा हो सकती है।

🏛️ ASI और वैज्ञानिक उत्खनन से खुलेंगे इतिहास के पन्ने, रायबरेली को मिलेगी नई पहचान

इतिहासकारों और पुरातत्व विशेषज्ञों का मानना है कि ओई भीट का यह प्राचीन टीला पुरातात्विक दृष्टिकोण से अत्यंत समृद्ध ऐतिहासिक खजाना साबित हो सकता है।

पुरातत्वविदों का कहना है कि यदि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और उत्तर प्रदेश राज्य सरकार मिलकर आधुनिक जियो-फिजिकल तकनीकों (GPR Survey) से यहां विधिवत खुदाई (Excavation) कराएं, तो उत्तर प्रदेश का 2000 साल पुराना भूला-बिसरा कुषाणकालीन इतिहास दुनिया के सामने आ सकता है। यदि वैज्ञानिक उत्खनन में कुषाणकालीन नगर की आधिकारिक पुष्टि होती है, तो रायबरेली का नाम देश के प्रमुख ऐतिहासिक और वैश्विक पर्यटन स्थलों के नक्शे पर स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो जाएगा। फिलहाल पूरे गांव और इतिहास शोधकर्ताओं की नजरें एएसआई की अगली आधिकारिक कार्रवाई पर टिकी हैं।

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