Bastar Dussehra 2026: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बस्तर में की शिरकत, आदिवासियों से जल-जंगल बचाने की अपील

छत्तीसगढ़

जगदलपुर: देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बस्तर दशहरा 2026 के पावन अवसर पर लालबाग मैदान में आयोजित भव्य आम सभा को संबोधित किया। कार्यक्रम की शुरुआत उन्होंने दीप प्रज्वलित कर की। इस दौरान उन्होंने आदिवासी समाज से जल, जंगल और पर्यावरण की रक्षा करने तथा अधिक से अधिक पेड़-पौधे लगाने की जोरदार अपील की। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, डिप्टी सीएम अरुण साव व विजय शर्मा, संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, वन मंत्री केदार कश्यप, सांसद महेश कश्यप, विधायक किरणदेव सहित कई स्थानीय देवी-देवता और गणमान्य लोग मौजूद रहे।

बस्तर की समृद्ध संस्कृति और परंपरा की सराहना

संबोधन की शुरुआत में राष्ट्रपति मुर्मू ने सभी को दशहरा पर्व की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह उनका बड़ा सौभाग्य है कि उन्हें मां दंतेश्वरी और बस्तर के तमाम देवी-देवताओं के दर्शन करने का पावन अवसर मिला। बस्तर की अनूठी संस्कृति और उत्सवों को देखकर उन्हें बेहद प्रसन्नता हुई है। उन्होंने कहा कि यहां का आदिवासी समाज जिस एकजुटता के साथ बस्तर दशहरा की ऐतिहासिक परंपरा को निभा रहा है, वह वाकई सराहनीय है और वे इसके लिए बधाई के पात्र हैं। लालबाग मैदान में उन्होंने जिक्र किया कि इस धरती पर रामायण और कई ऋषि-मुनियों से जुड़े प्रसंग मिलते हैं, और इस गौरवशाली संस्कृति को हमेशा संजोकर रखने की जरूरत है।

नक्सलवाद से मुक्ति और बस्तर ओलंपिक पर जताई उम्मीद

राष्ट्रपति ने प्रसन्नता जाहिर करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ लंबे समय तक नक्सलवाद की विभीषिका से प्रभावित रहा है, लेकिन अब केंद्र और राज्य सरकार के साझा प्रयासों से यहां के लोग नक्सल आतंक के साए से पूरी तरह मुक्त होकर आगे बढ़ रहे हैं। विकास की इसी नई ऊर्जा के कारण बस्तर में ‘बस्तर ओलंपिक’ जैसे भव्य खेल आयोजनों की शुरुआत हुई है। उन्होंने पूरा भरोसा जताया कि बस्तर के होनहार आदिवासी खिलाड़ी आने वाले समय में देश के लिए ओलंपिक में भी मेडल जीतकर देश का नाम रोशन करेंगे।

रामायण के प्रसंग और राष्ट्र निर्माण में आदिवासियों का योगदान

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आगे कहा कि केंद्र और राज्य के संयुक्त प्रयासों से छत्तीसगढ़ अब नक्सल हिंसा के काले दौर को पीछे छोड़कर प्रगति के पथ पर सरपट दौड़ रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि देश को ‘विकसित राष्ट्र’ बनाने के संकल्प में आदिवासी युवा अपनी अहम भूमिका निभाएंगे। रामायण का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि रावण के वध और राम की जीत में केवल वानर सेना और ऋषियों का ही नहीं, बल्कि जंगलों में निवास करने वाले आदिवासी समुदायों का भी महत्वपूर्ण योगदान था।

प्रकृति की पूजा और जंगलों को बचाने का आह्वान

आदिवासी समाज की प्रकृति के प्रति अटूट आस्था की तारीफ करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि यह समाज सदियों से पेड़-पौधों, नदियों, पत्थरों और मिट्टी की पूजा करता आया है। पेड़-पौधे हमें जीवन, शुद्ध हवा, जल और भोजन जैसी अनमोल चीजें प्रदान करते हैं। इसलिए केवल पूजा करना ही काफी नहीं है, बल्कि हमारा यह नैतिक कर्तव्य है कि हम जंगलों, पहाड़ों और पर्यावरण की रक्षा करें। उन्होंने आदिवासी भाई-बहनों से विशेष अपील की कि वे अपनी बंजर जमीनों और खेतों में नए पौधे लगाएं ताकि हमारी प्रकृति हमेशा हरी-भरी बनी रहे।

ऐतिहासिक मुरिया दरबार की परंपरा को जीवित रखने की अपील

लालबाग मैदान की सभा से पहले राष्ट्रपति मुर्मू ने बस्तर के ऐतिहासिक और प्रसिद्ध ‘मुरिया दरबार’ में भी शिरकत की। वहां उन्होंने आदिवासी समाज की अनोखी और प्राचीन लोकतांत्रिक परंपरा की जमकर तारीफ की। राष्ट्रपति ने भावुक अपील करते हुए आदिवासी समाज से कहा कि मुरिया दरबार जैसी अनमोल और सदियों पुरानी परंपरा को कभी भी बंद न होने दें, बल्कि इसे पूरी निष्ठा के साथ आगे आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवित रखें।

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