मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर : छत्तीसगढ़ 10वीं एवं 12वीं बोर्ड परीक्षा परिणाम में मनेन्द्रगढ़ स्थित नेत्रहीन विकलांग शिक्षण एवं प्रशिक्षण विद्यालय के विद्यार्थियों ने शानदार प्रदर्शन किया है. विद्यालय में अध्ययनरत सभी 16 नेत्रहीन दिव्यांग छात्र परीक्षा में सफल हुए हैं. शत-प्रतिशत परीक्षा परिणाम आने से विद्यालय परिवार में खुशी और गर्व का माहौल है.
विद्यालय में रहकर की पढ़ाई
जानकारी के अनुसार विद्यालय में रहकर 12वीं कक्षा के 7 तथा 10वीं कक्षा के 9 विद्यार्थी ब्रेल लिपि के माध्यम से अध्ययन कर रहे थे. कठिन परिस्थितियों और चुनौतियों के बावजूद विद्यार्थियों ने अपनी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के दम पर उल्लेखनीय सफलता हासिल की. इनमें से कुल 9 विद्यार्थियों ने प्रथम श्रेणी में परीक्षा उत्तीर्ण की है, जिसमें 12वीं के 5 और 10वीं के 4 छात्र शामिल हैं.
परिवार में खुशी का माहौल
विद्यालय प्रबंधन के मुताबिक नेत्रहीन बच्चों के लिए पढ़ाई आसान नहीं होती, लेकिन शिक्षकों के सतत मार्गदर्शन, विशेष शिक्षण पद्धति और विद्यार्थियों की मेहनत ने यह संभव कर दिखाया. परिणाम घोषित होते ही विद्यालय परिसर में उत्साह का माहौल बन गया. विद्यार्थियों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर अपनी खुशी जाहिर की.सफल विद्यार्थियों ने अपनी उपलब्धि का श्रेय विद्यालय के प्राचार्य, शिक्षकों और अभिभावकों को दिया.छात्रों ने कहा कि विद्यालय में उन्हें न केवल शिक्षा दी गई, बल्कि आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा भी मिली, जिसके कारण
सामाजिक संस्था ने भी दी शुभकामनाएं
नेत्रहीन विद्यार्थियों की इस उपलब्धि पर सामाजिक संस्था आम नागरिक मंच से जुड़े लोग भी विद्यालय पहुंचे.उन्होंने विद्यार्थियों और शिक्षकों को मिठाई खिलाकर शुभकामनाएं दीं. संस्था के सदस्यों ने कहा कि इन बच्चों की सफलता समाज के लिए प्रेरणादायी है और यह साबित करती है कि यदि अवसर और सही मार्गदर्शन मिले तो दिव्यांगजन भी किसी से कम नहीं हैं.
इस विद्यालय के कुल 9 छात्रों 10वीं और 12वीं बोर्ड की परीक्षा दी थी.छात्रों ने लगन और मेहनत से पढ़ाई की थी.छात्रों को पढ़ाने में यहां के शिक्षकों का भी बड़ा योगदान है,ये मेरे अकेले के प्रयास से नहीं हो सका है- संतोष चढ़ोकर, प्राचार्य, नेत्रहीन विद्यालय
प्रदेश का एकमात्र आवासीय नेत्रहीन विद्यालय
गौरतलब है कि मनेन्द्रगढ़ का विद्यालय छत्तीसगढ़ का एकमात्र ऐसा आवासीय नेत्रहीन विद्यालय है, जहां केवल दृष्टिबाधित बच्चे रहकर शिक्षा ग्रहण करते हैं. वर्षों से यह संस्था दिव्यांग विद्यार्थियों को शिक्षित कर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य कर रही है.इस वर्ष का शानदार परीक्षा परिणाम विद्यालय की गुणवत्ता और शिक्षकों की मेहनत को दर्शाता है. विद्यालय प्रबंधन ने भविष्य में भी विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा और सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कही है, ताकि दिव्यांग बच्चे आत्मनिर्भर बनकर समाज में अपनी अलग पहचान स्थापित कर सकें.
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