वॉशिंगटन/नई दिल्ली: संयुक्त राज्य अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे भारतीय नागरिकों को लगातार स्वदेश वापस भेजा जा रहा है।
विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका ने वर्ष 2025 से लेकर अब तक कुल 4,840 भारतीय नागरिकों को निर्वासित (Deport) किया है। इनमें केवल इस वर्ष (1 जनवरी 2026 से जुलाई 2026 तक) 1,273 भारतीयों को वापस भारत भेजा जा चुका है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने अपनी नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2025 में कुल 3,567 भारतीय नागरिकों को अमेरिका से निर्वासित किया गया था, जबकि 2026 में यह आंकड़ा 1,273 तक पहुंच चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत सरकार निर्वासन से जुड़े संवेदनशील मामलों पर विभिन्न देशों की सरकारों के साथ समन्वय बनाकर कार्य कर रही है।
🔍 नागरिकता सत्यापन के बाद ही होती है भारत वापसी की व्यवस्था, विदेश मंत्रालय ने बताई प्रक्रिया
प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने निर्वासन की कानूनी प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जब भी किसी देश से ऐसा कोई मामला भारतीय दूतावास या विदेश मंत्रालय के पास आता है, तो सबसे पहले गहन पड़ताल की जाती है।
उन्होंने कहा, “जब भी कोई डिपोर्टेशन का मामला हमारे पास आता है, तो हम पहले स्वयं यह जांच और सत्यापन करते हैं कि वह व्यक्ति वास्तव में भारत का नागरिक है या नहीं। एक बार जब हम पूरी तरह आश्वस्त हो जाते हैं कि संबंधित व्यक्ति भारतीय नागरिक ही है, तभी उनकी भारत वापसी और यात्रा की व्यवस्था की जाती है।”
उल्लेखनीय है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प प्रशासन द्वारा अवैध प्रवासियों (Illegal Immigrants) के खिलाफ चलाए जा रहे व्यापक अभियान के तहत बड़ी संख्या में लोगों को निर्वासित किया जा रहा है।
⛓️ डिपोर्टेशन उड़ानों में महिलाओं-बच्चों को बेड़ियां बांधने पर भारत का कड़ा विरोध
विदेशों से निर्वासित किए जा रहे भारतीय नागरिकों के साथ मानवीय और सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करना भारत सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है।
पूर्व में संसद में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जानकारी दी थी कि भारत सरकार ने अमेरिकी अधिकारियों के समक्ष औपचारिक रूप से यह मुद्दा उठाया है, ताकि यह पक्का किया जा सके कि वापस भेजे जा रहे लोगों के साथ मानवीय गरिमा के अनुकूल व्यवहार हो। भारत ने विशेष रूप से यह मजबूत अनुरोध किया था कि डिपोर्टेशन उड़ानों के दौरान महिलाओं और बच्चों को हथकड़ी या लोहे की जंजीरों से न बांधा जाए।
यह मानवीय चिंताएं तब और बढ़ गई थीं जब 2025 में 73 वर्षीय बुजुर्ग हरजीत कौर को अमेरिका से वापस भेजे जाने के दौरान उनके साथ दुर्व्यवहार किए जाने की खबरें मीडिया में आई थीं। इसके अतिरिक्त, डिपोर्टेशन चार्टर्ड फ्लाइट में महिलाओं और मासूम बच्चों को बेड़ियों व बंधनों में जकड़कर रखने की घटना की चौतरफा आलोचना हुई थी, जिसके तुरंत बाद भारत ने अमेरिकी प्रशासन के सामने कड़ा औपचारिक विरोध (Formal Protest) दर्ज कराया था।
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