रांची से सामने आए एक बड़े घटनाक्रम में, JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच ने राज्य सरकार से अपील की है कि विभिन्न परीक्षाओं को रद्द करने के निर्णय से जुड़े सभी तथ्यात्मक आधारों को पूरी दृढ़ता के साथ अदालत के समक्ष पेश किया जाए। मंच का कहना है कि 17 अगस्त को जिन ठोस तथ्यों और सबूतों के बिनाह पर सरकार ने परीक्षाओं को रद्द करने का बड़ा फैसला लिया था, उन्हें अब न्यायपालिका के सामने स्पष्ट रूप से रखा जाना बेहद जरूरी है, ताकि पूरे मामले की वास्तविक और दूध का दूध-पानी का पानी वाली स्थिति स्पष्ट हो सके।
📁 सीआईडी जांच रिपोर्ट और कैबिनेट के फैसलों को पारदर्शी तरीके से रखने पर जोर: हजारों छात्रों के भविष्य का है सवाल
मंच के प्रवक्ता रविंद्र पासवान ने प्रेस के माध्यम से कहा कि सरकार ने जिस सीआईडी जांच से जुड़े नोट और दस्तावेजों के आधार पर कैबिनेट में परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया था, उसे बिना किसी अस्पष्टता के अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए। यह पूरा मामला सीधे तौर पर प्रदेश के हजारों होनहार छात्रों के भविष्य और उनके सपनों से जुड़ा हुआ है। इसलिए सरकार को अपना पक्ष पूरी पारदर्शिता के साथ रखते हुए वे सभी दस्तावेज और आधार पेश करने चाहिए जिनके कारण यह कदम उठाया गया।
⚖️ छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की पुरजोर मांग: परीक्षा प्रणाली में सुधार और पारदर्शिता लाने पर भी दिया गया बल
वहीं, मंच के दूसरे प्रवक्ता पीयूष कुमार सिंह ने आंदोलन के दौरान विद्यार्थियों पर दर्ज की गई प्राथमिकियों (FIR) का गंभीर मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए शांतिपूर्ण आंदोलन करने वाले छात्रों के प्रति संवेदनशील रवैया अपनाते हुए सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप उन मुकदमों को वापस लिया जाए। मंच ने दो टूक कहा है कि राज्य में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर बार-बार विवाद और रद्दीकरण की स्थिति बनने से अभ्यर्थियों का मानसिक और शैक्षणिक नुकसान होता है, जिसे रोकने के लिए पारदर्शी और स्थाई परीक्षा प्रणाली का निर्माण होना चाहिए।
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