Pachmarhi Health Crisis: पचमढ़ी में डॉक्टरों का टोटा, इमरजेंसी में नहीं मिलता इलाज; मंकी बाइट के मरीज भी जिला अस्पताल रेफर

मध्य प्रदेश

पचमढ़ी: मध्य प्रदेश के एकमात्र हिल स्टेशन पचमढ़ी में सालभर आने वाले 4 लाख से अधिक पर्यटक जान जोखिम में डालकर भ्रमण करते हैं, क्योंकि पर्यटकों को यहां इलाज मिलने की कोई गारंटी नहीं है. पचमढ़ी में 30 बेड के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 5 डॉक्टर पद होने के बावजूद एक की भी नियुक्ति नहीं हुई है. दो नर्स और छोटे से स्टाफ के सहारे प्रदेश के सबसे बड़े पर्यटन स्थल की स्वास्थ्य सेवाएं चल रही हैं.

पर्यटकों या स्थानीय लोगों के बीमार या घटना, दुर्घटना में घायल होने पर उन्हें तत्काल रेफर कर दिया जाता है. इलाज के अभाव में कई मरीजों को जान भी गंवानी पड़ती है. अस्पताल में डॉक्टर की व्यवस्था न होने और उचित इलाज न मिल पाने के कारण पर्यटक परेशान होते हैं तो स्थानीय लोगों में नाराजगी बनी रहती है.

दो मामलों से समझे कैसी है स्वास्थ्य सेवाएं

मामला 1- शुक्रवार 20 मार्च को अंबा माई मंदिर के पीछे दोपहर 2 बजे एक 14 वर्षीय बच्चे को जहरीले सांप ने काट लिया. परिजन बच्चों को पचमढ़ी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए. अस्पताल में नर्स को बुलाया गया. डॉक्टर ना होने के कारण नर्स ने दर्द निवारक दवा और इंजेक्शन देकर गंभीर स्थिति में बच्चे को पिपरिया रेफर कर दिया. पीड़ित बच्चे के रिश्तेदार मानक परतेती ने बताया, ”डॉक्टर ना होने के कारण दवाई इंजेक्शन देकर रेफर कर दिया गया. जबकि डॉक्टर होने पर यहीं इलाज मिल जाता.”

मामला 2- शुक्रवार 20 मार्च शाम 4 बजे कोलकाता से आए तीन पर्यटक ड्रेसिंग रूम में अपने साथी की मरहम पट्टी कर रहे थे. पूछने पर बताया कि, बड़ा महादेव में घूमने गए थे, इसी दौरान एक बंदर ने कंधे पर काट लिया. अस्पताल आए थे तो नर्स ने एक इंजेक्शन और दर्द निवारक दवा दे दी. उचित इलाज करने को कहा तो जवाब मिला डॉक्टर नहीं है, यही इलाज होगा. ड्रेसिंग करने को कहा तो उन्होंने रुई पट्टी देकर खुद ही घाव साफ करने के लिए कह दिया. पर्यटकों ने कहा, अच्छा हुआ ज्यादा घाव नहीं था, क्योंकि टैक्सी वाले ने कहा था इलाज नहीं मिलेगा. आपको रेफर कर दिया जाएगा.

डॉक्टर नहीं, पंजीयन बंद
पचमढ़ी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर ना होने के कारण पंजीयन कक्ष में ताला लगा रहता है. अधिकांश समय अस्पताल पूरी तरह खाली रहता है. शुक्रवार दोपहर को मंकी बाइट के मरीज के आने पर बाहर बेंच पर सो रहे अस्पताल के कुक ने नर्स को बुलाया. मामूली इलाज के बाद नर्स अस्पताल से चली गई. सभी कमरे खाली थे. पैथोलॉजी लैब में लैब टेक्नीशियन की जगह उनका भाई बैठकर कंप्यूटर पर खेल रहा था. पूछने पर कहा कि भाई भोपाल गया है. ऑफिस खाली था तो मैं यहां आकर बैठ गया.

मंकी बाइट की सबसे अधिक घटनाएं
पचमढ़ी की आबादी करीब 12000 है. देश विदेश के करीब 4 लाख पर्यटक साल भर आते हैं. इसके अलावा शिवरात्रि और नागद्वारी मेले में भी 2 लाख से अधिक श्रद्धालु आते हैं. पचमढ़ी में प्रतिदिन 10 से 15 मंकी बाइट की घटनाएं विभिन्न स्थानों पर होती हैं. अस्पताल स्टाफ के अनुसार मंकी बाइट में कई लोग ज्यादा घायल होते हैं तो कोई मामूली प्रभावित रहता है. डॉक्टर होने पर उन्हें उचित इलाज मिल जाता है लेकिन डॉक्टर के अभाव में अस्पताल से हम ज्यादा दवाएं नहीं दे पाते हैं. ऐसे में मरीज को रेफर करना पड़ता है. पचमढ़ी में सर्पदंश के मामले में 100% को रेफर किया जाता है. गंभीर घटना दुर्घटना होने पर मरीज पिपरिया या नर्मदापुरम रेफर किया जाता है.

हमेशा कर देते हैं रेफर
स्थानीय निवासी नर्मदी बाई ने बताया, ”जब भी कोई मामला होता है थोड़ी बहुत दवाई देकर मरीज रेफर कर देते हैं. जबकि अस्पताल में सभी स्वास्थ्य सुविधा मौजूद हैं. ऑपरेशन थिएटर, गर्भवती महिलाओं के रूम सहित दूसरी सुविधा है. लेकिन डॉक्टर ना होने पर अस्पताल में आने वाले मरीजों को हमेशा रेफर कर दिया जाता है. यहां आने वाले पर्यटक यदि घायल हो जाए तो उन्हें उचित इलाज नहीं मिल पाता. अस्पताल की व्यवस्था देखकर वह खुद यहां इलाज नहीं लेते हैं.”

नई नियुक्ति से पोस्ट भरेंगे
जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर नर्सिंघ गहलोत ने बताया कि, ”पचमढ़ी की अपेक्षा पिपरिया सहित दूसरे अस्पतालों में मरीजों की संख्या ज्यादा है. इस कारण पचमढ़ी में नियुक्त डॉक्टर पिपरिया में सेवा दे रहे हैं. कोई वीआईपी मूवमेंट होता है तो पिपरिया से डॉक्टर पचमढ़ी भेजा जाता है. पचमढ़ी में कैंट और पुलिस हॉस्पिटल में नियुक्त डॉक्टर वहां मरीजों को देख लेते हैं. हालांकि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जल्द ही नई नियुक्ति से डॉक्टरों की पोस्ट भरी जाएगी.”

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