हिमाचल प्रदेश में सियासी हलचल तेज: मुकेश अग्निहोत्री और विक्रमादित्य सिंह बने दावेदार; खतरे में सुक्खू सरकार?

हिमांचल प्रदेश

शिमला/नई दिल्ली: कांग्रेस आलाकमान के सामने विभिन्न राज्यों में जारी पार्टी की अंदरूनी कलह को सुलझाना एक बार फिर बड़ी चुनौती बन गया है।

हाल ही में पार्टी नेतृत्व ने कर्नाटक में लंबे समय से चले आ रहे सियासी असंतोष को खत्म करते हुए मुख्यमंत्री बदलकर डीके शिवकुमार को कमान सौंपी थी। पंजाब के बाद अब पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश में भी अंदरूनी टकराहट गंभीर रूप ले चुकी है। ताजा सूत्रों के हवाले से खबर है कि हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की कुर्सी पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

सूत्रों के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश कांग्रेस की नवनियुक्त प्रभारी रजनी पाटिल ने राज्य के मौजूदा राजनीतिक हालात पर अपनी विस्तृत रिपोर्ट पार्टी आलाकमान को सौंप दी है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि यद्यपि राज्य में विधानसभा चुनावों में अभी डेढ़ साल का समय शेष है, लेकिन पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी और मौजूदा स्थिति संगठन के लिए बिल्कुल ठीक नहीं है।

⚠️ “कार्यशैली बदलें या फिर बदल दिया जाए मुख्यमंत्री”: रजनी पाटिल की रिपोर्ट में बड़ा सुझाव

पार्टी प्रभारी रजनी पाटिल द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट में आलाकमान को सख्त सुझाव दिया गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि या तो मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू अपनी कार्यशैली में बड़े स्तर पर बदलाव करें, अन्यथा उनके काम-काज की नए सिरे से समीक्षा की जाए और आवश्यकता पड़ने पर मुख्यमंत्री का चेहरा बदल दिया जाए।

उल्लेखनीय है कि सुक्खू राज्य में एनएसयूआई (NSUI), यूथ कांग्रेस और प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष रह चुके हैं, जिसके बाद वे सीधे मुख्यमंत्री पद पर आसीन हुए थे। इसी वजह से पार्टी के भीतर वरिष्ठ नेताओं का एक वर्ग शुरू से ही उनके प्रशासनिक अनुभव की कमी को लेकर सवाल उठाता रहा है।

👑 मुख्यमंत्री पद के कई बड़े दावेदार सक्रिय, मुकेश अग्निहोत्री और विक्रमादित्य सिंह की नजरें

हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर कई वरिष्ठ और प्रभावशली चेहरे लगातार अपनी दावेदारी मजबूत कर रहे हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत वीरभद्र सिंह के पुत्र विक्रमादित्य सिंह और वर्तमान डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री अरसे से इस पद पर नजर गड़ाए हुए हैं। 2022 में मुख्यमंत्री पद के चयन के दौरान भी ये दोनों नेता रेस में शामिल थे, लेकिन उस समय राहुल गांधी के वीटो के चलते सुक्खू को कमान सौंपी गई थी।

हालांकि, फरवरी 2024 में हुए राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी की हार और उसके बाद हुए उपचुनावों में मिली सियासी झटकों ने सुक्खू की सत्ता को सीधी चुनौती दी है, जो अब उनके लिए गले की फांस बन चुका है।

💥 सुक्खू और राहुल गांधी के लिए टेंशन भरी रिपोर्ट, नए सियासी समीकरणों पर सबकी नजर

राजनीतिक घटनाक्रमों के दौरान विक्रमादित्य सिंह कई बार सार्वजनिक रूप से बगावती तेवर दिखाते रहे हैं।

पूर्व में राहुल गांधी के सीधे हस्तक्षेप के कारण सुक्खू अपनी कुर्सी बचाने में सफल रहे थे, जिसके चलते तत्कालीन प्रभारी राजीव शुक्ला को पद से हटना पड़ा था। लेकिन अब नई पार्टी प्रभारी रजनी पाटिल की सीधी और बेबाक रिपोर्ट ने मुख्यमंत्री सुक्खू के साथ-साथ आलाकमान के लिए भी नई मुसीबत खड़ी कर दी है। देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस नेतृत्व हिमाचल में कर्नाटक जैसा बदलाव करता है या सुक्खू अपनी कुर्सी बचाने में कामयाब रहते हैं।

What do you feel about this post?

0%
like

Like

0%
love

Love

0%
happy

Happy

0%
haha

Haha

0%
sad

Sad

0%
angry

Angry