ग्वालियर। मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि तलाक के बाद पूर्व पत्नी को अपने पूर्व पति की संपत्ति या सेवा संबंधी लाभों पर दावा करने का अधिकार नहीं रहता। इसी महत्वपूर्ण आधार पर अदालत ने तलाकशुदा पत्नी की रिट अपील को खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की युगलपीठ ने यह फैसला अमरी बाई अहिरवार द्वारा दायर की गई रिट अपील पर सुनाया है, जो दिवंगत कर्मचारी रामचरण अहिरवार के सेवानिवृत्ति लाभ और अनुकंपा नियुक्ति से जुड़ा था।
📝 क्या था पूरा मामला और एकलपीठ का आदेश?
यह मूल याचिका रामचरण अहिरवार की पूर्व पत्नी और उनकी पुत्री द्वारा दायर की गई थी। मामले की सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने संबंधित विभाग को निर्देश दिए थे कि यदि दिवंगत कर्मचारी द्वारा किया गया नामांकन वैध पाया जाता है, तो सेवानिवृत्ति संबंधी समस्त लाभ उन्हें प्रदान किए जाएं। साथ ही, पुत्री के अनुकंपा नियुक्ति के आवेदन पर भी नियमानुसार विचार करने के निर्देश दिए गए थे।
🛑 अमरी बाई अहिरवार की अपील और अदालत की टिप्पणी
एकलपीठ के इस आदेश को अमरी बाई अहिरवार ने चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान उन्होंने स्वीकार किया कि उनका रामचरण अहिरवार से विधिवत तलाक हो चुका था, लेकिन उनका तर्क था कि दूसरी महिला भी कानूनी रूप से पत्नी नहीं है, इसलिए उसे भी लाभ नहीं मिलना चाहिए। इस पर खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि जब अपीलकर्ता का वैवाहिक संबंध तलाक के जरिए पहले ही समाप्त हो चुका है, तो पूर्व पति की संपत्ति या सेवा लाभों पर उसका कोई कानूनी अधिकार नहीं बचता।
👨👧 बेटी के अधिकारों और हक को लेकर अहम बात
अदालत ने यह भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि यदि यह मान भी लिया जाए कि दूसरी महिला का विवाह वैध नहीं था, तब भी दिवंगत कर्मचारी की पुत्री होने के नाते बेटी सेवानिवृत्ति लाभ प्राप्त करने और अनुकंपा नियुक्ति के लिए पूरी तरह हकदार रहेगी। इन सभी तथ्यात्मक और कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने माना कि एकलपीठ के आदेश में किसी प्रकार की त्रुटि नहीं है, जिसके चलते अमरी बाई अहिरवार की अपील को खारिज कर दिया गया।
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