भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार ऑलराउंडर शार्दुल ठाकुर ने टीम में अपनी वापसी को लेकर अपनी मंशा साफ कर दी है। 34 वर्षीय शार्दुल का मानना है कि उनमें अभी भी देश के लिए खेलने का जज्बा बाकी है और वे एक और मौके का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने पिछले साल इंग्लैंड में खेली गई ‘एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी’ के दौरान अपने साथ हुए व्यवहार पर असंतोष जताया है।
📉 इंग्लैंड दौरे पर ‘अंडर-यूटिलाइज’ होने का दर्द
शार्दुल ठाकुर ने खुलासा किया कि इंग्लैंड दौरे पर उन्हें बहुत कम गेंदबाजी कराई गई और जो भी मौके मिले, वे गलत समय पर थे। उन्होंने इसे ‘कैलकुलेशन एरर्स’ (गणना की गलती) करार दिया है। गौरतलब है कि उस दौरे पर टीम की कमान शुभमन गिल के पास थी और हेड कोच गौतम गंभीर थे। शार्दुल के इस बयान को कप्तान और कोच के फैसलों पर सीधे सवाल के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि उन्हें दो टेस्ट मैचों में केवल 27 ओवर फेंकने का मौका मिला था।
🏏 बल्लेबाजी में अपनी कमी को स्वीकारा
शार्दुल ने अपनी बल्लेबाजी पर भी बात की और लीड्स टेस्ट में खेले गए खराब शॉट को अपनी गलती माना। हालांकि, उन्होंने मैनचेस्टर टेस्ट में की गई अपनी पारी का जिक्र करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में उन्होंने स्विंग होती गेंदों का सामना कर भारत को मजबूत स्कोर तक पहुंचाया था, जिससे मैच ड्रॉ कराने में मदद मिली।
🔄 ‘उम्मीद अभी जिंदा है’, टीम इंडिया में वापसी का संकल्प
लगभग 12 महीने पहले अपना आखिरी इंटरनेशनल मैच खेलने वाले शार्दुल ठाकुर ने कहा कि उनका लक्ष्य 100 प्रतिशत टीम इंडिया में वापसी करना है। उन्होंने कहा, “भले ही आपको टीम से बाहर कर दिया गया हो, लेकिन ‘उम्मीद’ एक बहुत बड़ा शब्द है। जब तक उम्मीद जिंदा है, तब तक सब कुछ मुमकिन है।” शार्दुल का यह बयान उन क्रिकेट प्रेमियों के लिए बड़ी उम्मीद है जो उन्हें दोबारा भारतीय जर्सी में खेलते देखना चाहते हैं।
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