दमोह: बेटे की चाह में अंधविश्वास का ऐसा खेल कि एक गर्भवती महिला ने किसी ओझा की बात मानकर खुद को अपने ही घर में कैद कर लिया। गनीमत रही कि लोकल स्वास्थ्यकर्मियों की सजगता से महिला को अस्पताल भेजा जा सका, जहां उसका सुरक्षित प्रसव हो गया। अंधविश्वास के इस खेल को बंदेज का नाम दिया गया है। जिसमें किसी ओझा के कहने पर परिवार का सदस्य बाहरी लोगों से दूरी बना लेता है। 6 बेटियों के बाद बेटे की चाह थी इसलिए महिला ने ऐसा कदम उठाया।
दरअसल जिले के मडियादो के गांव में रहने वाली 38 साल की कमलेशरानी आदिवासी कि पहले से 6 बेटियां थी और वो सातवीं बार बेटे की चाह में गर्भवती हुई। किसी ओझा ने उससे कह दिया कि तुम्हें बाहरी दुनिया से संपर्क खत्म करके अपने घर में कैद रहना है। महिला ने वैसा ही करना शुरू कर दिया, लेकिन इस बंदेज के कारण उसके स्वास्थ्य में गिरावट आने लगी। स्थानीय स्वास्थ्यकर्मी सोना अहिरवार ने जब महिला का चेकअप करने का प्रयास किया तो उसने छूने से भी मना कर दिया।
उसका कहना था कि यदि कोई उसे छू लेगा तो उसके यहां बेटा नहीं होगा। स्वास्थ्य कर्मियों ने काफी प्रयास किया और इसके बाद अपने वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी जानकारी दी। अधिकारी मौके पर पहुंचे और काउंसलिंग करने के बाद महिला को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां पता चला कि महिला के शरीर में मात्र 3 ग्राम ही खून बचा है। उसे ब्लड दिया गया और सुरक्षित प्रसव कराया गया, जिसमें उसने 3 किलो के शिशु को जन्म दिया है।
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