अभिनेत्री से सांसद बनी कंगनी रनौत ने एक बार फिर ऐसा बयान दे दिया है जिससे उनकी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. कंगना ने केंद्र सरकार की ओर से वापस लिए गए 3 कृषि कानूनों को फिर से लागू किए जाने की बात कही जिससे सियासी पारा चढ़ गया. हालांकि बीजेपी ने कंगना के बयान से खुद को अलग कर लिया. लेकिन अब बीजेपी के सहयोगी भी कंगना के बयान से नाराज दिख रहे हैं. जनता दल यूनाइटेड के नेता केसी त्यागी ने कहा कि कंगना आखिर किसकी मदद कर रही हैं.
हिमाचल प्रदेश के मंडी सीट से लोकसभा सांसद कंगना रनौत ने मांग करते हुए कहा था कि केंद्र सरकार को 3 कृषि कानूनों को फिर से लाना चाहिए जिन्हें भारी विरोध के बाद वापस ले लिया गया था. ये तीनों कानून किसानों के हित में थे और उन्हें खुद इसे वापस लाने की मांग करनी चाहिए. हालांकि खुद कंगना रनौत ने कहा, “हो सकता हैकि उनकी इस बात पर विवाद हो, लेकिन इसेलागू करना चाहिए.” इस बयान के बाद कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल सत्तारुढ़ बीजेपी पर हमलवार हो गए हैं.
BJP-NDA की छवि खराब हो रहीः कंगना
केंद्र की एनडीए सरकार में सहयोगी जनता दल यूनाइटेड के नेता केसी त्यागी ने भी कंगना के बयान पर अपनी नाराजगी जताई है. केसी त्यागी ने कहा, “बीजेपी ने कंगना रनौत के बयान से किनारा कर लिया है लेकिन विधानसभा चुनाव के ऐन मौके पर जब हरियाना में तीनों कृषि कानून मुद्दा बने हुए हैं. इस तरह की बयानबाजी करके कंगना आखिर किसकी मदद कर रही हैं.”
उन्होंने कहा, “आज हरियाणा में कई जगहों पर उनके खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं. हमेशा लाइमलाइट में रहने के लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल दुरुपयोग करने के लिए कर रही हैं. इस तरह के बयानों से बीजेपी और एनडीए की छवि खराब होती है. इसके लिए बीजेपी या पीएम (नरेंद्र मोदी) को दोष देना ठीक नहीं है.” उन्होंने कहा कि कृषि कानूनों को लेकर पीएम मोदी और कृषि मंत्री ने पहले ही स्थिति साफ कर चुके है. सरकार लगातार किसानों के संपर्क में भी है. करीब 24 फसलों की एमएसपी पहले से बढ़ा दी गई है.
बयान पर कांग्रेस लगातार हमलावर
हालांकि बयान देने के बाद विवाद बढ़ने पर कंगना ने अपना बयान वापस ले लिया. बयान वापस लेते हुए सांसद ने कहा, “किसान कानून से संबंधित कुछ सवालों पर मैंने सुझाव दिया कि किसानों को किसान कानून वापस लाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी से निवेदन करना चाहिए. लेकिन इस बात से बहुत से लोग निराश हो गए हैं. प्रधानमंत्री ने बड़े संवेदनशीलता से कृषि कानूनों को वापस लिया था. मैं मानती हूं कि मेरे विचार अपने नहीं होने चाहिए, मेरी पार्टी का स्टैंड होना चाहिए. अगर मैंने अपनी सोच से किसी को निराश किया है तो मुझे इसका खेद है. मैं अपने शब्द वापस लेती हूं.”
कांग्रेस इस बयान पर हमलावर हो गई है. कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, “750 किसानों की शहादत के बाद भी किसान विरोधी बीजेपी और नरेंद्र मोदी सरकार को घोर अपराध का अहसास नहीं हुआ. इन तीनों काले कृषि कानूनों को फिर से लागू करने की बात की जा रही है. कांग्रेस इसका कड़ा विरोध करती है.” कांग्रेस नेता दीपेंद्र हुड्डा ने कहा, “मैं चुनौती देता हूं. हरियाणा में कांग्रेस की सरकार बनेगी. ऐसी कोई ताकत नहीं है जो इन तीनों काले कृषि कानूनों को फिर से लागू करवा सके.”
कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर किसानों ने लंबे समय तक प्रदर्शन किया था. किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए मोदी सरकार ने दिसंबर 2021 में तीनों कानूनों को निरस्त करने का ऐलान किया. तब पीएम मोदी ने कहा था, “मैं किसानों को समझा नहीं पाया, कहीं चूक हुई है.”
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