सूरजपुर: आजादी के अमृत काल में भी जिले के भैयाथान में गुलामी के जमाने के हालात हैं. यहां खेत में बने गड्ढे में जमा पानी पीने को ग्रामीण मजबूर है. स्थानीय भाषा में इसे ढोरी या डबरी कहते हैं जहां भरे पानी को पीकर न जाने कितनी बीमारियों को ये लोग दावत दे रहे हैं. लेकिन इनका कहना है कि आखिर करें तो करें क्या? जीएं या मरें पानी तो पीना ही है.
ऐसा पानी जिसे पीना तो दूर, छूने से भी लगे डर
भैयाथान विकासखंड के ग्राम पंचायत केवटाली के जुडहा पारा और बरपारा में रहने वाले ग्रामीण खेत में बने डबरी का गंदा पानी पी रहे हैं. ऐसा पानी पीने को ग्रामीण मजबूर हैं जिसे आप छूना तक पसंद नहीं करेंगे. ग्रामीणों का कहना है कि करीब 10-15 साल से पेयजल की कोई सुविधा ही मुहैया नहीं कराई गई.
डेढ़ किलोमीटर चलने की मजबूरी
ग्रामीणों को दिन हो या रात एक डेढ़ किलोमीटर दूर चलने के बाद भी गंदा पानी ही नसीब होता है. ग्रामीणों ने आपबीती सुनाते हुए कहा कि इस पानी को पीने से बच्चे में बीमारी फैलती रहती है और हमेशा हॉस्पिटल ले जाना पड़ता है. इसका असर हमारी आर्थिक स्थिति पर भी पड़ता है. और तो और ये डबरी जंगल के पास रहने के कारण जंगली जानवरों का खतरा भी बना रहता है.
बच्चे पानी को देखकर बोलते हैं कि इसे कैसे पीएं, लेकिन क्या करें मजबूरी है पानी नहीं पीएंगे तो कैसे रहेंगे, अब जीएं या मरें ये पानी पीने की ही मजबूरी है– सुमित्रा, ग्रामीण
आंदोलन की तैयारी
यहां के स्थानीय जन-प्रतिनिधि भी शासन प्रशासन की व्यवस्था पर ही सवाल खड़े कर रहे. उनका यहां तक कहना है कि जनप्रतिनिधियों और बाकी कई मदों की मिलने वाली राशि का आवंटन तक हमें नहीं हुआ है. अब जनप्रतिनिधि भी ग्रामीणों के साथ मिलकर आंदोलन की तैयारी में है. वहीं मामले में प्रशासनिक अधिकारी इस मामले में बचते नजर आए.
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