रायपुर: पूर्व सीएम भूपेश बघेल की उप सचिव रहीं सौम्या चौरसिया के खिलाफ ईडी का शिकंजा कसता जा रहा है. इस केस में ईडी ने सौम्या चौरसिया को 16 दिसंबर को गिरफ्तार किया था. प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) 2002 के प्रावधानों के तहत यह गिरफ्तारी हुई थी. उसके बाद 17 दिसंबर को सौम्या चौहरिया को विशेष अदालत में पेश किया गया. पीएमएलए की स्पेशल कोर्ट ने ED को तीन दिनों की रिमांड दी थी जो शुक्रवार को पूरी हो गई.
सौम्या चौरसिया पर ईडी ने क्या कहा
इस केस में शुक्रवार को ईडी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर मीडिया को अमह जानकारी दी है. इस प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि ED ने ACB/EOW, रायपुर छत्तीसगढ़ द्वारा IPC, 1860 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज FIR के आधार पर जांच शुरू की. जांच में पता चला है कि छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से राज्य के खजाने को भारी नुकसान हुआ. 2500 करोड़ रुपये से ज़्यादा की आपराधिक कमाई इससे अर्जित की गई.
ईडी की जांच में हुए अहम खुलासे
ED की जांच में पता चला कि सौम्या चौरसिया को लगभग 115.5 करोड़ रुपये की अपराध की कमाई मिली थी. इसके अलावा, डिजिटल रिकॉर्ड, जब्त सामग्री और लिखित बयानों के रूप में इकट्ठा किए गए सबूतों से यह साबित होता है कि सौम्या चौरसिया शराब सिंडिकेट में सक्रिय भूमिका थी.
सौम्या चौरसिया की संलिप्तता आई सामने
डिजिटल सबूत उनकी भूमिका को सिंडिकेट के प्रमुख सदस्यों, जिनमें अनिल टुटेजा और चैतन्य बघेल शामिल हैं. अवैध धन के उत्पादन और लॉन्ड्रिंग में मदद मिली. इसके साथ ही, बरामद चैट से सिंडिकेट के शुरुआती संगठन में उनकी संलिप्तता का पता चलता है, जिसमें अरुण पति त्रिपाठी और निरंजन दास को आबकारी विभाग में महत्वपूर्ण पदों पर रखने में मदद करना शामिल है.
शराब घोटाला, कई नामचीन लोगों की हुई है गिरफ्तारी
इससे पहले छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा, अरविंद सिंह, त्रिलोक सिंह ढिल्लों, अनवर ढेबर, अरुण पति त्रिपाठी और कवासी की गिरफ्तारी हुई थी. इस केस में चैतन्य बघेल भी जेल में है और जांच जारी है.
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