उत्तर भारत के कई राज्यों में भीषण गर्मी से राहत तो मिली, लेकिन बदले मौसम ने भारी तबाही मचा दी है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और झारखंड में आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं में 40 से अधिक लोगों की जान चली गई है। अचानक आए इस मौसम के रौद्र रूप ने आम जनजीवन को पूरी तरह से प्रभावित कर दिया है।
🚨 उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा तबाही
उत्तर प्रदेश में आंधी-तूफान और बारिश ने सबसे ज्यादा कहर बरपाया है, जहाँ 31 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। रायबरेली, अंबेडकरनगर, बांदा, हमीरपुर, महोबा, मथुरा और प्रतापगढ़ जैसे जिलों में आकाशीय बिजली और मकान ढहने से कई परिवारों ने अपनों को खो दिया है। सहारनपुर की पहाड़ियों पर मूसलधार बारिश के बाद आई बाढ़ ने दो महिलाओं की जान ले ली है।
🏔️ पहाड़ों पर भी कुदरत का रौद्र रूप
उत्तराखंड के तुंगनाथ-चोपता क्षेत्र में आकाशीय बिजली गिरने से लखनऊ के दो सगे भाइयों की मौत हो गई। यहाँ फंसे 45 से अधिक पर्यटकों को सुरक्षित निकाला गया है। रुड़की, हरिद्वार और ऋषिकेश में पेड़ गिरने और बिजली के खंभे टूटने से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित रहा। कई क्षेत्रों में घंटों बिजली आपूर्ति ठप रही और विकासनगर में भारी क्षति की सूचना है।
⚡ मध्य प्रदेश और झारखंड में भी नुकसान
मध्य प्रदेश के भिंड जिले में आंधी और बिजली गिरने से तीन लोगों की मौत हो गई और कई मवेशी मारे गए। वहीं, झारखंड में पिछले 24 घंटों के दौरान गढ़वा, रांची, धनबाद और बोकारो जिलों में आकाशीय बिजली गिरने से 5 लोगों की मौत हो गई है। राज्य में बारिश से गर्मी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मौतों के आंकड़ों ने प्रशासन को चिंता में डाल दिया है।
संपादकीय टिप्पणी: मौसम की यह अनिश्चितता पर्यावरण में हो रहे बदलावों का संकेत है। आकाशीय बिजली और तूफान जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान सावधानी बरतना ही बचाव का एकमात्र तरीका है। क्या आपको लगता है कि प्रशासन को ग्रामीण इलाकों में आकाशीय बिजली से बचाव के लिए अधिक ‘लाइटनिंग अरेस्टर’ लगाने चाहिए? अपने विचार नीचे साझा करें।
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