वाराणसी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत वाराणसी को देश के सबसे आधुनिक धार्मिक शहरों में बदलने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। करीब 25 हजार करोड़ रुपए की लागत से ‘वरुणा और गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर’ पर काम तेज हो गया है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद वाराणसी में दिल्ली-NCR की तर्ज पर एलिवेटेड सड़कों का नेटवर्क विकसित होगा, जिससे शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह बदल जाएगी।
🚫 भूमि अधिग्रहण और प्रशासन की सख्ती
परियोजना को पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने प्रभावित 41 गांवों में जमीन की खरीद-बिक्री, दान-पत्र और भूमि उपयोग परिवर्तन पर अगले आदेश तक पूरी तरह रोक लगा दी है। एनएचएआई (NHAI) की योजना के अनुसार, इस कॉरिडोर का उद्देश्य शहर के भीतर वाहनों का दबाव कम करना और बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को सीधे गंतव्य तक पहुंचाना है।
🏗️ कॉरिडोर की भव्य रूपरेखा
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वरुणा लिंक कॉरिडोर: NH-31 से रिंग रोड तक 21.153 किमी लंबा फोर-लेन मार्ग।
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गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर: NH-19 से रिंग रोड तक 18.100 किमी लंबा सिक्स-लेन मार्ग।
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इंटरचेंज सुविधा: एयरपोर्ट से आने वाले यात्रियों के लिए हरहुआ चौराहे से एलिवेटेड फ्लाईओवर की सुविधा, जो नमो घाट और सिग्नेचर ब्रिज से जुड़ेगा।
🛕 श्रद्धालुओं को बड़ी राहत
इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ बाबा विश्वनाथ के भक्तों को मिलेगा। अब एमपी, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड और यूपी के अन्य जिलों से आने वाले श्रद्धालु शहर के व्यस्त मार्गों में फंसे बिना सीधे पार्किंग स्थल तक पहुंच सकेंगे। मंदिर क्षेत्र के निकट 4 हजार वाहनों की क्षमता वाली विशाल पार्किंग का निर्माण भी प्रस्तावित है।
🌟 काशी के विकास का ‘गेम चेंजर’
वाराणसी के मेयर अशोक तिवारी के अनुसार, यह प्रोजेक्ट काशी के लिए गेम चेंजर होगा। प्रशासन की प्राथमिकता है कि कम से कम किसानों की जमीन का उपयोग हो और अधिकतम सरकारी भूमि का इस्तेमाल किया जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना न केवल यातायात को सुगम बनाएगी, बल्कि पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति प्रदान करेगी।
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