US के आदेश के बाद हुआ सीजफायर… BJP विधायक का बड़ा बयान

मध्य प्रदेश

मध्यप्रदेश बीजेपी एक तरफ अपने नेताओं की जुबान पर लगाम लगाने की कोशिश कर रही है तो वहीं दूसरी तरफ नेताओं की बयानबाजी थमने का नाम नहीं ले रही था. प्रदेश की मोहन यादव सरकार में मंत्री विजय शाह और डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा के बाद अब बीजेपी विधायक इंजीनियर नरेंद्र प्रजापति ने विवादित बयान देकर पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं.

रीवा के मनगवां से बीजेपी विधायक इंजीनियर नरेंद्र प्रजापति पाकिस्तान के खिलाफ की गई ने सेना की कार्रवाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कार्यक्रम बता डाला. यही नहीं विधायक ने ये भी कहा कि अमेरिका से आदेश आया इसलिए युद्ध विराम हुआ. तिरंगा यात्रा के बाद आयोजित सभा में भाषण के दौरान विधायक प्रजापति ने कहा कि पीएम के नेतृत्व में जो कार्यक्रम चल रहा था उससे पाकिस्तान को खत्म कर दिया जाता अगर यूनाइटेड नेशन से सीजफायर का आदेश नहीं आता.

सोशल मीडिया वायरल हो रहा वीडियो

इंजीनियर नरेंद्र प्रजापति का ये वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है. उनके इस बयान से बीजेपी के सामने परेशानी खड़ी हो गई है, वहीं कांग्रेस समेत विपक्षी दलों को पार्टी के खिलाफ एक और मुद्दा मिल गया है. मनगवां विधानसभा सीट विंध्य के रीवा जिले से आती है. नरेंद्र प्रजापति ने बीजेपी के टिकट पर पहला बार चुनाव लड़ा था और जीत दर्ज की थी. पेशे से इंजीनियर प्रजापति ने कांग्रेस प्रत्याशी बबीता साकेत को 31912 वोटों से शिकस्त दी थी.

विजय शाह का कर्नल सोफिया पर विवादित बयान

इससे पहले प्रदेश के मंत्री विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी को आतंकियों की बहन बताया था. उनके इस बयान को लेकर बवाल मचा हुआ है. कांग्रेस ने शाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई और उन्हें मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने की मांग की. 15 मई को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने शाह से इस मामले में माफी मांगने को कहा, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने शाह की अंतरिम राहत याचिका खारिज कर दी और उनके बयान को आक्षेपजनक बताया.

उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने भी दिया विवादित बयान

वहीं मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री जगदीप देवड़ा के ऑपरेशन सिंदूर और सेना को लेकर दिए गए बयान से बवाल मच गया है. हाल ही में देवड़ा ने एक सार्वजनिक सभा में कहा कि पूरा देश और सेना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चरणों में नतमस्तक है. देवड़ा का यह बयान ऑपरेशन सिंदूर की सफलता और सीमा पर संघर्ष विराम की प्रशंसा के संदर्भ में था, लेकिन उन्होंने सेना को सीधे प्रधानमंत्री के अधीन दिखाने वाला बयान देकर विवाद खड़ा कर दिया.

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