भारत में UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने के बहुप्रतीक्षित फैसले को फिलहाल दिवाली 2026 तक के लिए टाल दिया गया है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने स्पष्ट किया है कि चुनिंदा मर्चेंट पेमेंट पर यह व्यवस्था दिवाली के ठीक तुरंत बाद लागू की जाएगी, जिसके लिए अलग से आधिकारिक तारीख की घोषणा की जाएगी। इस फैसले के सामने आते ही Paytm, Pine Labs, Zaggle Prepaid, One MobiKwik Systems और Moneyview जैसी प्रमुख फिनटेक कंपनियों के शेयरों में अच्छी खासी तेजी और रिकवरी देखने को मिली है।
NPCI की UPI और सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी ने आगामी त्योहारी सीजन को पूरी तरह ध्यान में रखते हुए यह अहम फैसला लिया है। जानकारों के अनुसार, MDR चार्ज लागू होने में हुई इस देरी से फिनटेक कंपनियों और व्यापारियों को त्योहारी सीजन के दौरान बड़ा व्यावसायिक लाभ मिल सकता है।
📈 फिनटेक शेयरों में जोरदार रिकवरी और बाजार का हाल
MDR लागू करने का फैसला टलने की खबर आते ही कई प्रमुख फिनटेक शेयरों में जबरदस्त सुधार दर्ज किया गया:
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Paytm (One97 Communications): इस कंपनी का शेयर मंगलवार को 1,571 रुपये के निचले स्तर से बढ़कर कुछ ही मिनटों में 1,675 रुपये पर पहुँच गया और इसके बाद भी इसमें बढ़त बनी रही।
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Pine Labs & Zaggle Prepaid: Pine Labs का शेयर 154.42 रुपये से उछलकर 165 रुपये तक पहुँच गया, जबकि Zaggle Prepaid का शेयर भी संभलकर 170 रुपये के आसपास कारोबार करता नजर आया।
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Moneyview & MobiKwik: Moneyview और One MobiKwik Systems के शेयरों में भी निचले स्तरों से अच्छी रिकवरी दर्ज की गई।
इससे पहले जब MDR लगाए जाने की खबरें आई थीं, तब निवेशकों में चिंता बढ़ गई थी और Paytm व MobiKwik के शेयरों में 7% से 10% तक की भारी गिरावट देखने को मिली थी।
🪙 क्या है UPI MDR चार्ज और इसके मायने?
MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह शुल्क होता है जो डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने वाले व्यापारियों के लेनदेन पर लगाया जाता है। प्रस्तावित नियमों के तहत:
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₹2,000 से ज्यादा के कुछ चुनिंदा UPI मर्चेंट पेमेंट पर 0.40% तक MDR लगाया जाना था, जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 तय की गई थी।
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पर्सन-टू-पर्सन (P2P) ट्रांसफर और 2,000 रुपये तक के सभी मर्चेंट पेमेंट पूरी तरह फ्री रखे गए हैं।
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कुछ विशेष क्षेत्रों के ट्रांजैक्शन पर 5 रुपये का निश्चित शुल्क और कैपिटल मार्केट से जुड़े लेनदेन पर 0.02% (अधिकतम सीमा ₹300) का प्रावधान है।
चूंकि इस व्यवस्था से डिजिटल पेमेंट कंपनियों को कमाई का एक बड़ा जरिया मिलने की उम्मीद थी, इसलिए इसके टलने से कंपनियों को आगे का समय मिल गया है, और नई तारीख घोषित होने के बाद ही यह चार्ज प्रभावी होगा।
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