रांची। अपनी विभिन्न न्यायसंगत मांगों को लेकर झारखंड स्टेट स्वास्थ्य चिकित्सा सेवा संघ (झासा), आईएमए (IMA) झारखंड इकाई और 10 से अधिक निजी अस्पताल संचालकों संगठनों का चरणबद्ध आंदोलन लगातार जारी है। वर्तमान में चिकित्सक काली पट्टी बांधकर मरीजों का उपचार कर रहे हैं। सरकार द्वारा मांगों पर ठोस कार्रवाई न किए जाने पर डॉक्टरों ने 21 अक्टूबर को राज्यभर में धरना-प्रदर्शन और 22 अक्टूबर से पूर्ण कार्य बहिष्कार (स्ट्राइक) का ऐलान किया है।
🏛️ रिम्स और सदर अस्पताल में उमड़ी डॉक्टरों की भीड़, निदेशक कार्यालय को सौंपा ज्ञापन
आंदोलन की रणनीति तय करने के लिए बुधवार को राजधानी रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) और सदर अस्पताल में चिकित्सकों का विशाल महाजुटान हुआ। IMA के आह्वान पर सैकड़ों की संख्या में पहुंचे वरीय डॉक्टरों, जूनियर डॉक्टरों, सरकारी चिकित्सकों और निजी अस्पताल संचालकों ने एक स्वर में मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का संकल्प लिया। जुटान के बाद चिकित्सकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने रिम्स निदेशक कार्यालय पहुंचकर संयुक्त चिकित्सा आंदोलन का ज्ञापन सौंपा और समयबद्ध कार्रवाई की मांग की।
🛡️ चिकित्सक सुरक्षा, क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट संशोधन और DACP हैं प्रमुख मांगें
संयुक्त चिकित्सा आंदोलन के साझा मंच से झारखंड मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट का प्रभावी क्रियान्वयन, क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट में व्यावहारिक संशोधन, केंद्र और बिहार के समान DACP (Dynamic Assured Career Progression) लागू करना, आयुष्मान भारत के बकाया भुगतान का समाधान, और महिला चिकित्सकों की सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए। डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि यह आंदोलन मरीजों के हितों के खिलाफ नहीं है, बल्कि चिकित्सक मरीजों की बेहतर देखभाल के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और आपातकालीन सेवाएं सुचारू रहेंगी।
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