Ujjain Mahakal Temple: सावन के पहले सोमवार पर भगवान महाकाल की भव्य भस्म आरती, शाम को चंद्रमौलेश्वर स्वरूप में निकलेगी पहली सवारी

धार्मिक

उज्जैन (मध्य प्रदेश): सावन मास के प्रथम सोमवार के पावन अवसर पर उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में आस्था और भक्ति का अलौकिक दृश्य देखने को मिला।

श्रावण कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि पर तड़के आयोजित होने वाली सुप्रसिद्ध भस्म आरती में सहभागिता हेतु हजारों की संख्या में दूर-दराज से आए श्रद्धालु देर रात से ही मंदिर परिसर में अनुशासित पंक्तियों में कतारबद्ध रहे। जैसे ही रात्रि 2:30 बजे मंदिर के गर्भगृह के मुख्य द्वार (पट) खोले गए, संपूर्ण प्रांगण ‘जय श्री महाकाल’ और ‘हर-हर महादेव’ के गगनभेदी जयघोषों से गुंजायमान हो उठा। भक्तों ने बाबा महाकाल के अति-दिव्य और अलौकिक स्वरूप का दर्शन कर पुण्य अर्जित किया।

🥛 वीरभद्र जी की आज्ञा के साथ शुरू हुआ पूजन, फलों के रस व पंचामृत से हुआ महाकाल का अभिषेक

श्री महाकालेश्वर मंदिर के वरिष्ठ पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि भस्म आरती की पौराणिक परंपरा अनुसार सर्वप्रथम वीरभद्र जी से आज्ञा ली गई।

तदुपरांत गर्भगृह में विराजित सभी देवी-देवताओं का विधिवत पूजन-अर्चन संपन्न हुआ। इसके पश्चात भगवान श्री महाकालेश्वर का पवित्र जल, दूध, दही, शुद्ध घी, शक्कर, पंचामृत तथा अनेक प्रकार के सुगन्धित रसों एवं फलों के रस से महाअभिषेक किया गया।

👑 ‘हरि ओम’ जल अर्पण के बाद कपूर आरती, ड्राई फ्रूट्स माला से हुआ बाबा महाकाल का विशेष शृंगार

विशेष पूजन के क्रम में प्रथम घंटाल बजाकर ‘हरि ओम’ का जल अर्पित किया गया।

तत्पश्चात पुजारियों और पुरोहितों ने भगवान महाकाल का अत्यंत मनमोहक शृंगार किया। कपूर आरती के उपरांत बाबा महाकाल को नवीन मुकुट धारण कराया गया। इस बार के विशेष सोमवारी शृंगार में भगवान को ड्राई फ्रूट्स (काजू, बादाम, मखाना) की विशेष माला भी पहनाई गई, जो श्रद्धालुओं के आकर्षण का मुख्य केंद्र बिंदु रही।

🔥 महानिर्वाणी अखाड़े ने अर्पित की पवित्र भस्म, शंखनाद और नगाड़ों से गूंजा प्रांगण

शृंगार की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद महानिर्वाणी अखाड़े के प्रतिनिधियों की ओर से भगवान महाकाल के शिवलिंग पर पवित्र भस्म अर्पित की गई।

इसके साथ ही झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़ों और शंखनाद की मधुर ध्वनि के बीच पारंपरिक भस्म आरती संपन्न हुई। धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के पश्चात ही भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप धारण कर अपने भक्तों को दर्शन प्रदान करते हैं। इस अलौकिक क्षण के प्रत्यक्षदर्शी बनने हेतु देश-विदेश से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने भस्म आरती में शीश नवाया।

🐘 शाम 4 बजे चंद्रमौलेश्वर स्वरूप में निकलेगी पहली सवारी, 1100 बटुक करेंगे क्षिप्रा तट पर वैदिक उद्घोष

श्रावण मास के प्रथम सोमवार के अवसर पर भगवान महाकाल शाम को चंद्रमौलेश्वर स्वरूप में अपनी प्रजा का हाल जानने के लिए नगर भ्रमण पर निकलेंगे।

श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के प्रशासक एवं अपर कलेक्टर प्रथम कौशिक के अनुसार, अपराह्न 3 से 4 बजे के मध्य मंदिर के सभामंडप में भगवान श्री चंद्रमौलेश्वर का विधिवत पूजन-अर्चन और आरती संपन्न होगी। तत्पश्चात शाम 4 बजे भगवान रजत पालकी में विराजमान होकर नगर भ्रमण हेतु प्रस्थान करेंगे। मंदिर के मुख्य द्वार पर सशस्त्र पुलिस बल की टुकड़ी द्वारा पालकी को गार्ड ऑफ ऑनर (सलामी) दिया जाएगा।

इस वर्ष की प्रथम शाही सवारी की आधिकारिक थीम ‘वैदिक उद्घोष’ रखी गई है। इस विशेष आयोजन के तहत क्षिप्रा नदी के पावन रामघाट तट पर 1100 बटुक एक साथ सस्वर वैदिक मन्त्रोच्चार करेंगे। महाकाल की पहली सवारी को लेकर संपूर्ण उज्जैन नगरी में उल्लास, उमंग और भक्तिमय माहौल व्याप्त है।

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