कोलकाता: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से ही तृणमूल कांग्रेस (TMC) गहरे राजनीतिक संकट से गुजर रही है। पार्टी को एक के बाद एक बड़े झटकों का सामना करना पड़ रहा है। हालिया घटनाक्रम में पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने अपने पद और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। इस बगावत की आग यहीं नहीं रुकी, बल्कि टीएमसी के 10 से अधिक सांसदों ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की है, जिससे पार्टी में बड़ी टूट की आशंका गहरा गई है।
⚖️ राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय का इस्तीफा
ऐसे समय में जब ममता बनर्जी दिल्ली में विपक्षी दलों के ‘INDIA’ गठबंधन की बैठक में व्यस्त थीं, सुखेंदु शेखर रॉय ने राज्यसभा के सभापति से मिलकर अपना इस्तीफा सौंप दिया। पार्टी के भीतर अपने अपमान और उपेक्षा का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें उच्च सदन में पीछे की कतार में धकेले जाने से लेकर कामकाज के तौर-तरीकों तक से गहरा असंतोष था।
🤝 बागी सांसदों की सूची और केंद्रीय मंत्री से मुलाकात
दावा किया जा रहा है कि जिन 10 से अधिक सांसदों ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की है, उनमें काकली घोष दस्तीदार, प्रसून बनर्जी, शताब्दी रॉय, जून मालिया और पार्थ भौमिक जैसे बड़े चेहरे शामिल हैं। यह मुलाकात पार्टी के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े करती है। विपक्ष का कहना है कि यह केवल शुरुआत है और आने वाले दिनों में कई और बड़े नेता टीएमसी का साथ छोड़ सकते हैं।
🗳️ बंगाल में राज्यसभा का समीकरण
पश्चिम बंगाल में राज्यसभा की कुल 17 सीटों में से वर्तमान में 13 सीटें टीएमसी के पास हैं और 3 भाजपा के पास। सुखेंदु शेखर रॉय के इस्तीफे के बाद इन समीकरणों के बदलने की संभावना है। लोकसभा सांसदों के बीच भी बढ़ती नाराजगी को देखते हुए यह कयास लगाए जा रहे हैं कि बंगाल की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है।
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